-दरगाह से उठा अमन का पैगाम, भारत मोहब्बत से चलता है, नफरत से नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। धनतेरस की रौशन शाम में दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह एक बार फिर रूहानी रोशनी में नहाई नजर आई।मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) की जानिब से सालाना जश्ने-चिराग का आयोजन किया गया। दीयों की जगमग, रंग-बिरंगे चिराग और सूफियाना कव्वालियों की गूंज ने माहौल को मोहब्बत और एकता की खुशबू से भर दिया।
कार्यक्रम की अगुवाई एमआरएम के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने की। उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाकर मुल्क की अमन, तरक्की और खुशहाली की दुआ की। इस मौके पर उन्होंने कहा, कि भारत ही दुनिया का असली शांति मॉडल है। हमें अपने मुल्क को नशामुक्त, दंगामुक्त और पर्यावरण युक्त बनाना है। तालीम, तहजीब और तरक्की, यही असली रास्ता है। इस दौरान दरगाह के सज्जादानशीन अफसर निजामी और सलमी निजमी ने कहा, कि निजामुद्दीन औलिया की दरगाह सदियों से मोहब्बत, इंसानियत और एकता का प्रतीक रही है।
वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सईद ने कहा, कि भारत नफरत से नहीं, मोहब्बत से चलता है। जो लोग इसे तोड़ना चाहते हैं, वे इसकी रूह को नहीं समझते। इस मौके पर डॉ शालिनी अली ने कहा, कि असली रौशनी दिलों में जलती है और डॉ शाहिद अख्तर ने तालीम और तहजीब को समाज की बुनियाद बताया। वहीं देशभर से आए अकीदतमंदों ने मिलकर दुआ की ए खुदा, इस मुल्क में अमन कायम रख। इस खुसनुमा शाम के जरिए चिरागों की रोशनी और सूफियाना सरगम में दरगाह से अमन और चैन का पैगाम उठा।