लिफ्ट गिरने का मामला : भाई जगजीत ने कहा-कुलवंत का दिल्ली में मन नहीं लग रहा था
कुलवंत डेढ़ साल से काम कर रहा था, रविवार को पहली बार लिफ्ट में सवार हुआ
हादसे में जान गंवाने वाले दीपक काे पहली सैलरी मिलने वाली थी
सन्नी के परिवार ने मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की
्रअमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कुलवंत का मन दिल्ली में नहीं लग रहा था, वह विदेश जाना चाहता था। वह विदेश चला गया होता तो जिंदा होता। यह कहकर उसके बड़े भाई जगजीत सिंह की आंखों से आंसू छलक उठे। वहीं हादसे में जान गंवाने वाले दीपक काे पहली सेलरी मिलने वाली थी। घटना में मृतक के परिवार वालों ने फैक्टरी के मालिक और मैनेजर पर लापरवाही बरतने का आरोपी लगाया है। उनका आरोप है कि घटना के तुरंत बाद ही अगर घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाता तो उनकी जान बच सकती थी। वहीं सन्नी के परिवार वालों का कहना है कि वह परिवार में कमाने वाला अकेला था। परिवार वालों ने मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है।
परिवार वालों ने बताया कि सभी मृतक एक कंपनी के जरिये फैक्टरी के हाउस कीपिंग विभाग में काम करते थे। जगजीत सिंह ने बताया कि कुलवंत साल 2017 में जार्डन गया था, जहां वह काम करता था। 2020 में कोरोना महामारी की वजह से वह दिल्ली आ गया लेकिन लॉकडाउन की वजह से वह वापस नहीं जा सका। 2021 में वह विदेश जाना चाहता था, लेकिन पिता का देहांत हो जाने की वजह से उसे विदेश जाना टालना पड़ा था। जगजीत ने बताया कि उनके परिवार में उनकी मां, दादी और छोटी बहन है। कुलवंत डेढ़ साल से यहां काम कर रहा था। उसने चौंकाने वाली बात बताई कि रविवार को वह पहली बार लिफ्ट में सवार हुआ था और हादसे का शिकार हो गया। जगजीत यह कहकर रोने लगा कि कुछ दिन से कुलवंत कह रहा था कि उसका दिल्ली में मन नहीं लग रहा है और वह विदेश जाकर नौकरी करना चाहता है।
दीपक के छोटे भाई भुवनेश ने बताया कि उसने एक महीना पहले ही फैक्टरी में काम करना शुरू किया था। उसने बताया कि उसका भाई काफी खुश था कि उसे पहली सैलरी मिलने वाली है। उसने आरोप लगाया कि घटना में तीन कर्मचारियों की मौत हो गई लेकिन फैक्टरी की ओर से कोई भी हाल चाल तक पूछने तक नहीं आया है। उनका आरोप है कि सवा तीन बजे घटना हुई और परिवार वालों को पुलिस ने सवा पांच बजे इसकी जानकारी दी। घटना होते ही वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने कर्मचारियों को फैक्टरी से बाहर निकाल दिया और घटना की जानकारी पुलिस को दी। उनका कहना है कि घायलों को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता तो उनकी जान बच सकती थी।
वहीं सन्नी के भाई संजय ने बताया कि सन्नी शादीशुदा था और उसका 11 साल का बेटा है। सन्नी परिवार में अकेला कमाने वाला सदस्य था। उसकी मौत के बाद घर में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है। परिवार को मुआवजा मिलने के साथ साथ एक सदस्य को नौकरी मिलनी चाहिए।