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Noida News: कश्मीरी के श्रेष्ठ कवि व समालोचक पद्मश्री रहमान राही का निधन

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-साहित्य अकादमी ने आधे दिन तक अपने सभी कार्यालय बंद कर जताया शोक
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-कहा, उन्होंने अपनी कृतियों द्वारा कश्मीरी भाषा को अत्यंत समृद्ध किया

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
कश्मीरी कवि, अनुवादक, आलोचक व साहित्य अकादमी के महत्तर सदस्य रहमान राही का सोमवार को सुबह श्रीनगर स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। साहित्य जगत से जुड़ी विभूतियों ने रहमान राही के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दोपहर 1.30 बजे साहित्य अकादमी सभाकक्ष में एक मौन शोक सभा का आयोजन किया गया। शोक सभा के बाद उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए साहित्य अकादमी के सभी कार्यालयों को आधे दिन के लिए बंद कर दिया गया।

साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवासराव ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि रहमान राही साहित्य के गंभीर अध्येता और जीवन के व्यापक अनुभव के धनी थे। वह साहित्य, विचारधारा व आस्था के मामले में हर तरह की खेमेबंदी से दूर रहे। अपनी अद्भुत रचनात्मकता के चलते वे कश्मीरी साहित्य की अमूल्य धरोहर बने रहेंगे। उनका निधन कश्मीरी साहित्य के लिए एक गहरा शून्य और एक समृद्ध विरासत छोड़ गया है।
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कश्मीरी के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कवियों और समालोचकों में से एक रहे रहमान राही ने अपनी कृतियों द्वारा कश्मीरी भाषा को अत्यंत समृद्ध किया। उन्हेें साहित्य अकादमी पुरस्कार 1961 में उनके कविता-संग्रह नौरोज-ए-सबा के लिए दिया गया। सन 2002 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मश्री और 2004 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले कश्मीरी लेखक थे। उन्हें साहित्य अकादमी का सर्वोच्च सम्मान महत्तर सदस्यता 2000 में प्रदान की गई थी। 6 मई 1925 को श्रीनगर में जन्मे रहमान राही ने 1948 में अपना कार्य जीवन लोक निर्माण विभाग में लिपिक के रूप में आरंभ किया। वे प्रगतिशील आंदोलन से भी जुड़े रहे और उसकी पत्रिका क्वांग पोश के कुछ अंकों का संपादन भी किया। 1953-55 तक वह दिल्ली से प्रकाशित उर्दू दैनिक आजकल के संपादक मंडल के सदस्य रहे। 1964 में फारसी विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में पदभार ग्रहण करने से पूर्व उन्होंने कई महाविद्यालयों में अध्यापन किया। डाक्टर फाउस्टस और बाबा फरीद इत्यादि अनेक कृतियों का अंग्रेजी से कश्मीरी में अनुवाद भी किया।
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