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गुरू मंत्र : अनुभव से सीखना बच्चों के विकास के लिए जरूरी

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उर्वशी त्यागीकम्पोजिट विद्यालय ममुरा
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बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखकर पढ़ाने के बजाय उन्हें अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर देना चाहिए। मेरा प्रयास रहता है कि छात्र लर्निंग बाय डूइंग के जरिए विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकें। इसके लिए बच्चों को समूहों में बांटकर प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियां कराई जाती हैं। जब बच्चे स्वयं प्रयोग करते हैं, मॉडल तैयार करते हैं और अपनी प्रस्तुति देते हैं तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने की रुचि भी विकसित होती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने और रचनात्मक तरीके से सीखने की क्षमता विकसित करना है। विद्यालय में छात्रों को इसी तरह सीखने के अवसर दिए जाते हैं, जिससे उनका मानसिक और व्यावहारिक विकास हो सके।
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- उर्वशी त्यागी, सहायक अध्यापक, कंपोजिट विद्यालय मामूरा, नोएडा
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