वर्ष 2022 की सक्रिय भूमि जल संसाधन रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में हर साल 71.45 अरब घन मीटर पानी जमीन के अंदर जाता है। प्रदेश की भूजल की दोहन क्षमता करीब 65.30 अरब घन मीटर है। जबकि 46.14 अरब घन मीटर पानी निकाल लिया जाता है। यानी रिचार्ज होने वाले भूजल का 70.66 फीसदी हर साल निकाल लिया जाता है। इस लिहाज से यूपी भूजल के नजरिए से नाजुक श्रेणी में आता है। इसी कड़ी में गौतमबुद्ध नगर में करीब 51439.78 घन मीटर भूजल रिचार्ज होता है। इसका बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश से आता है। शहर में 47,661 घन मीटर भूजल का दोहन किया जा सकता है। लेकिन 49,434 घन मीटर पानी निकाला जा रहा है। इस लिहाज से शहर में 103.72 फीसदी भूजल दोहन हो रहा है।
रिपोर्ट बताती है कि मूल्यांकन में शामिल की गई तीन इकाइयों में से एक में भूूजल का अति दोहन हो रहा है। वहीं, बाकी दो इकाइयां बेहद नाजुक और नाजुक श्रेणी में हैं। किसी भी इलाके का भूजल सुरक्षित नहीं है। दनकौर इलाके के भूजल में फ्लोराइड पाया गया। इसकी वजह भी पानी का स्तर नीचे गिरते जाने को बताया गया है।
1442 वर्ग किमी क्षेत्र का किया मूल्यांकन
शहर में 1442.73 वर्ग किमी क्षेत्र में भूजल रिचार्ज की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन किया गया। इसमें से 32.84 फीसदी (473.82 वर्ग किमी) का भूजल नाजुक श्रेणी, 44.13 फीसदी (636.66 वर्ग किमी) बेहद नाजुक और 23.03 फीसदी (332.25 वर्ग किमी) अति दोहन का शिकार मिला है।