-सेक्टर-22 अर्बन हेल्थ सेंटर में लोगों को नहीं मिलतीं सुविधाएं
- डॉक्टर से इलाज के लिए दो गज की दूरी भी जरूरी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा।
मरीज की जरूरी जांच मौके पर ही हो जाए इसके लिए अर्बन हेल्थ सेंटर पर हेल्थ एटीएम लगाए गए थे, लेकिन सेक्टर-22 स्थित अर्बन हेल्थ सेंटर में हालत बिल्कुल उलट है। यहां हेल्थ एटीएम आए तीन साल हो चुके हैं, मगर मशीन आज तक डिब्बे से बाहर ही नहीं निकाली गई। प्रवेश करते ही यह मशीन एक कोने में रखी दिख जाती है, और अस्पताल प्रशासन मशीन का प्रयोग समान रखने के लिए कर रहा है। मशीन के चालू न होने के कारण मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि जब यहां सुविधाएं हैं ही नहीं, तो सीधे जिला अस्पताल ही चले जाना बेहतर है।
इलाज के लिए दो गज दूरी का नियम
शुक्रवार सुबह करीब 11.30 बजे एक महिला मरीज डॉक्टर को दिखाने पहुंची। स्टूल पर बैठने के कुछ देर बाद ही उसे खड़े होने के लिए कहा गया और कमरे का दूसरा गेट भी खोलने को कहा गया। स्टाफ के अनुसार, मरीज और डॉक्टर के बीच दो गज की दूरी बनाए रखना जरूरी बताया गया है। डॉक्टर के इस व्यवहार की शिकायत कई मरीज पहले भी कर चुके हैं।
पानी की भी सुविधा नहीं
हेल्थ सेंटर में मरीजों के साथ स्टाफ को भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। स्टाफ अपने घर से पानी लाकर काम चला रहा है और मरीजों के मांगने पर अपना पानी उन्हें दे रहा है। वहीं सेंटर के बाहर भी गंदगी फैली हुई है।
मरीज बोले, सुविधाओं पर दें ध्यान
मुझे सिर में दर्द रहता है, इसलिए अक्सर आती हूं। यहां सुविधाएं थोड़ी और बढ़नी चाहिए।
हीरा देवी
मैं अपने और बेटी के इलाज के लिए आई हूं। दवाइयां ले रही हूं, देखते हैं आराम मिलता है या नहीं।
मंजू देवी
एक ऐसा अर्बन हेल्थ सेंटर भी…
सेक्टर-15 नया बांस स्थित अर्बन हेल्थ सेंटर अन्य सभी हेल्थ सेंटरों के लिए मिसाल है। डॉक्टरों और स्टाफ के व्यवहार से प्रभावित होकर यहां दिल्ली के गांधी नगर जैसे दूर-दराज इलाकों से भी लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भी दिल्ली से मरीज यहां उपचार के लिए आए। हेल्थ सेंटर में प्रवेश करते ही यह महसूस नहीं होता कि यह कोई सरकारी केंद्र है। साफ-सुथरा वातावरण और सुव्यवस्थित व्यवस्था इसे निजी क्लिनिक जैसा अनुभव कराता है।
प्रभारी डॉ मनीषा ने बताया कि यहां ऑनलाइन पर्चे भी बनाए जा रहे हैं। साथ ही लैब टेक्नीशियन की व्यवस्था होने से अधिकांश जांचें यहीं पर हो जाती हैं, जिससे मरीजों को बाहर भटकना नहीं पड़ता। यहां कुत्ते के काटने पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगने की सुविधा भी उपलब्ध है।