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गेमिंग एप से ठगी: पहले छोटी रकम जिताकर लगाते थे आदत...फिर डुबो देते थे जमा पूंजी; ग्रेनो में मजाबुक का खुलासा

Thu, 08 Jan 2026 01:29 PM IST
राहुल तिवारी माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। तीन पुरुष और पांच महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर फर्जी दस्तावेज, सिम कार्ड, मोबाइल, लैपटॉप और नकदी बरामद की गई है।
 
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आठ आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग/ऑनलाइन गैंबलिंग के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन पुरुष अभियुक्तों और पांच महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में फर्जी और फर्जी बैंक दस्तावेज, पासबुक, डेबिट कार्ड, प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर उपकरण, क्यूआर कोड और नकदी बरामद की है। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह मजाबुक मजे से जीतो नामक ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर ठगी करता था।

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डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि  आरोपी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिकेट, कसीनो, एविएटर, रूलेट और नंबरिंग गेम जैसे खेल खिलवाते थे। शुरुआत में ग्राहकों को छोटी-छोटी रकम जितवाकर उनका भरोसा और लालच बढ़ाया जाता था। जैसे ही ग्राहक अधिक धनराशि लगाने लगता, खेल का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उसे लगातार हरवाया जाता और उसकी जमा पूंजी डुबो दी जाती थी। यदि कोई ग्राहक जीतकर रकम निकालने की बात करता तो उसे तकनीकी बहानों से टाल दिया जाता या बड़ी राशि की शर्त लगाकर भुगतान रोका जाता था। ज्यादा दबाव बनाने पर ग्राहकों को ब्लॉक कर दिया जाता और पूरी रकम हड़प ली जाती थी।

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फर्जी खातों और सिम से चलता था खेल
गिरोह फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर सिम कार्ड खरीदता था। उन्हीं सिम कार्डों पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। ग्राहकों से पैसे इन्हीं खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से ट्रांसफर कराए जाते थे। बरामद सिम कार्ड प्री-एक्टिवेटेड थे, जिन्हें अलग-अलग राज्यों के पते दिखाकर लिया गया था। पुलिस को इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक सहित कई बैंकों के खातों की डिटेल मिली है, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों के लेनदेन में किया जाता था। 

गुप्त सूचना पर रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी
एडीसीपी सेंट्रल नोएडा संतोष कुमार ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गौड़ सिटी क्षेत्र में एक कार्यालय से ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सूचना के आधार पर गठित टीम ने बुधवार को गौड़ सिटी सेंटर के चौथे तल पर छापा मारा। मौके पर कई लोग मोबाइल और लैपटॉप पर ऑनलाइन दांव लगाते मिले। छापेमारी के दौरान 18 एंड्रॉयड मोबाइल, 4 लैपटॉप, 155 फर्जी सिम कार्ड, 50 से अधिक क्यूआर कोड, 2 कंप्यूटर मॉनिटर, 4 वाई-फाई मॉडेम, 10 डाटा शीट, 10 कॉलिंग हेडफोन और 45 हजार रुपये नकद बरामद किए गए।
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गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
गिरफ्तार अभियुक्तों में गर्व (21), अजय सिंह (25), सोनल उर्फ अनिरुद्ध (32) शामिल हैं। वहीं महिला अभियुक्ताओं में रुचि (20), कोमल (20), सुषमा (21), तनीषा (20) और सानिया सिंह (23) शामिल हैं। सभी अभियुक्त अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं और पिछले कई महीनों से इस ठगी के नेटवर्क से जुड़े थे।

कॉलिंग और डाटा मैनेजमेंट का जिम्मा
एसीपी सेंट्रल नोएडा दीक्षा सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी सोनल उर्फ अनिरुद्ध ने पूछताछ में बताया कि वह कॉलिंग और डाटा मैनेजमेंट का काम देखता था। वह ऐसे लोगों का डाटा जुटाता था, जिन्होंने पहले कभी ऑनलाइन गेम खेले हों या इस तरह के विज्ञापनों में रुचि दिखाई हो। इसके बाद कॉलिंग स्टाफ उन लोगों को फोन कर अधिक कमाई का लालच देता था। नए ग्राहकों को लुभाने के लिए बोनस और फ्री गेम की सुविधा भी दी जाती थी, जिसे निकाला नहीं जा सकता था।

बिना रजिस्ट्रेशन चल रही थी कंपनी
पुलिस के अनुसार, गिरोह ट्रेंट्रैक इनोवेटिव सॉल्यूशंस नाम से पिछले छह महीनों से यह गतिविधि चला रहा था। जो कहीं भी रजिस्टर नहीं थी और न ही उसका कोई जीएसटी नंबर था। कूटरचित दस्तावेजों के सहारे सिम और बैंक खाते खुलवाकर इन्हें गेमिंग ऐप और कॉलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं, जुआ अधिनियम और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।  इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खातों की भी जांच की जा रही है। 
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