जिग्नेश पांचाल ने दी लिक्विड स्टोरेज टैंक
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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अस्पतालों में लगातार हो रही मरीजों की मौत के आंकड़ों ने आम लोगों को झकझोर कर रख दिया है। इससे छुटकारा पाने व अस्पतालों में भर्ती मरीजों के बेहतर उपचार के लिए जिले के एक उद्यमी ने अनोखी पहल की है। औद्योगिक क्षेत्र साइट-बी के उद्यमी जिग्नेश पांचाल ने अपनी फैक्टरी में स्थापित ऑक्सीजन लिक्विड टैंक को उखाड़कर दो अस्पतालों में लगाने के लिए दिया है। उनके इस कदम की चारों तरफ सराहना की जा रही है।
जिले में कुल सक्रिय मरीजों की संख्या आठ हजार के पार पहुंच चुकी है। लगातार मौतें भी हो रही हैं। ऐसे में अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों को बचाने के लिए समाजसेवी संगठनों के साथ उद्यमी संगठनों ने भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ग्रेटर नोएडा चैप्टर के चेयरमैन विशारद गौतम के प्रयास से साइट-बी के उद्यमी जिग्नेश पांचाल ने लोगों की जान बचाने के लिए अपनी फैक्टरी में स्थापित लिक्विड टैंक को ग्रेटर नोएडा के प्रकाश अस्पताल समूह व दनकौर स्थित निम्स अस्पताल को देने का फैसला किया है।
दूर हो सकेगी ऑक्सीजन की किल्लत
प्रकाश अस्पताल समूह ने ऑक्सीजन किल्लत के कारण अपने कुल क्षमता को 50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। प्रशासन को पत्र भेज कर सूचित भी किया गया। अस्पताल में 100 मरीजों की क्षमता है। ऑक्सीजन लिक्विड टैंक मिलने के बाद यहां भर्ती मरीजों के लिए ऑक्सीजन की किल्लत काफी हद तक दूर हो जाएगी।
मरीज भर्ती करने से किया इनकार
निम्स अस्पताल ऑक्सीजन किल्लत के कारण लगातार गंभीर मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर रहा है। बुधवार को भी अस्पताल ने कई मरीजों को ऑक्सीजन किल्लत के कारण भर्ती नहीं किया गया। इस अस्पताल में ऑक्सीजन लिक्विड टैंक को बृहस्पतिवार तक शिफ्ट कर दिया जाएगा।
9000 सिलिंडर की है क्षमता
उद्यमी जिग्नेश पांचाल की ओर से निम्स व प्रकाश अस्पताल लगाए जा रहे लिक्विड ऑक्सीजन टैंक की क्षमता 9000 सिलिंडर की होगी। प्रति दिन 150-150 सिलिंडर इससे भरे जा सकेंगे। इससे निर्बाध रुप से अस्पताल में भर्ती मरीजों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
जिले में बढ़ते संक्रमण से लोगों की लगातार मौतें हो रही हैं। इसे रोकने के लिए आईआईए के साथ एक बैठक की गई। इसके लिए मैंने फैसला किया है कि इकाई अभी बंद है, ऐसे में ऑक्सीजन टैंक अस्पताल को उपयोग के लिए दिया जा सकता है। इस प्रयास से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है।- जिग्नेश पांचाल, उद्यमी