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बेबसी: ग्रेटर नोएडा के 72 से ज्यादा गांवों में हाहाकार, दुजाना में एक हफ्ते में 19 और खैरपुर में एक माह में 25 मौतें

Wed, 12 May 2021 03:44 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा

सार

कोरोना की दूसरी लहर ने गांवों में हाहाकार मचाया हुआ है। ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र के दुजाना गांव में एक सप्ताह में 19 लोगों की मौत हो चुकी है जो बुखार से पीड़ित थे। वहीं, ग्रेनो वेस्ट के खैरपुर गुर्जर गांव में एक माह में 25 लोगों की मौत हो गई है। अन्य गांवों में भी लगातार मौतें हो रही हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से लापरवाही बरती जा रही है। स्वयं सैनिटाइज कराने को मजबूर हैं।
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दादरी पहुंचे डीएम और नोडल अफसर, लिया हालात का जायजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर ने गांवों में हाहाकार मचाया हुआ है। ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र के दुजाना गांव में एक सप्ताह में 19 लोगों की मौत हो चुकी है जो बुखार से पीड़ित थे। वहीं, ग्रेनो वेस्ट के खैरपुर गुर्जर गांव में एक माह में 25 लोगों की मौत हो गई है। अन्य गांवों में भी लगातार मौतें हो रही हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से लापरवाही बरती जा रही है। स्वयं सैनिटाइज कराने को मजबूर हैं।

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दरअसल, दादरी क्षेत्र के गांवों में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है। इलाज के अभाव में लोग बुखार आने पर घर पर ही इलाज कर रहे हैं जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। दादरी के दुजाना गंव में एक सप्ताह के दौरान बुखार चढ़ने पर विकास, विजयपाल, दर्शन, बदलू, राजकुमार, फिरे, सुमित्रा देवी, राजे, बिज्जन, मेहरचंद, ज्ञानवती, सावित्री, रणवीर, सुमन देवी, हरवीरी,  रेनू, प्रेमराज, अजीत सिंह, सुभाष चंद की मौत हो गई है।

एक ही गांव के 19 लोगों की मौत से दहशत
एक ही गांव में 19 लोगों की मौत से ग्रामीण दहशत में है। हालात यह हैं कि गांव में इस समय 200 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीण घर पर रहकर इलाज करा रहे हैं। ग्रामीण भूपेंद्र मास्टर ने बताया कि गांव में सैनिटाइज भी नहीं कराया जा रहा है। ग्रामीण स्वयं सैनिटाइजेशन करा रहे है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से गांव में वैक्सीन का शिविर लगाने की मांग की है।
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खैरपुर में मरने वालों में बुजुर्ग ज्यादा 
इधर, ग्रेनो वेस्ट के खैरपुर गुर्जर गांव में एक माह में 25 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में बुजुर्ग की संख्या ज्यादा है। मंगलवार को गांव में मौत का आंकड़ा सोशल मीडिया पर छाया रहा। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कोरोना संक्रमण काफी फैल चुका है। बड़ी संख्या में लोगों में बुखार और अन्य लक्षण हैं। घर पर ही लोग इलाज करा रहे हैं। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गांव में  जांच शिविर नहीं लगाया गया है। प्राधिकरण भी सैनिटाइज नहीं करा रहा है।

शाहबेरी संघर्ष समिति के कोषाध्यक्ष की कोरोना से मौत

शाहबेरी गांव में मंगलवार को शाहबेरी संघर्ष समिति के कोषाध्यक्ष मयंक अग्रवाल की भी मौत हो गई। वोे ग्रेनो वेस्ट के यथार्थ अस्पताल में भर्ती थी। उनके पिता की 4 मई को मौत हो गई थी। मां का अस्पताल में इलाज चल रहा है। घर पर उनकी पत्नी अकेली है। शाहबेरी के लोगों का कहना है कि गांव में रोजाना मौत हो रही है। स्वास्थ विभाग की तरफ से यहां पर कोई रोकथाम नहीं की जा रही है। गांव में जांच शिविर लगाने की मांग की है। ताकि लोगों को समय पर इलाज मिल सके। हर पांचवें घर में कोरोना संक्रमित है।

ज्यादातर स्वास्थ केन्द्र बंद, लोग परेशान
बिलासपुर क्षेत्र के गांवों में खांसी, बुखार, जुकाम आदि बीमारी की चपेट में है। किसी ना किसी गांव में मौत हो रही है। कुछ गांवों में 12 से अधिक मौत हो चुकी है। नवादा, अस्तौली, पारसौल, मंडीश्यामनगर, देवटा, जमालपुर, बिलासपुर, नियाना, सलेमपुर आदि गांव में कोरोना से काफी लोगों की मौत हो चुकी है। यहां पर सरकारी अस्पताल बंद है। शहर के अस्पताल ग्रामीणों की बजट से बाहर है। सहीं परामर्श नहीं मिलने के कारण लोग घर पर ही दम तोड़ रहे है। ग्रामीण वैक्सील लगवाने की मांग कर रहे है। छह स्वास्थ केन्द्र में से केवल एक पर वैक्सीन लगाई जा रही है। सभी उपकेन्द्र और दनकौर उपकेन्द्र को छोड़कर बाकी सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बंद है। टीकाकरण भी नहीं हो रहा है। लंबी लाइन लग रही है।

72 गांवों में कोरोना संक्रमण से सैकड़ों बीमार
दनकौर क्षेत्र के करीब 72 गांवों में लगातार लोगों की मौतें हो रही हैं। गांव के लोग स्थानीय झोलाछाप चिकित्सकों से ही दवाई लेकर घर पर इलाज कर रहे हैं। आरोप है कि सरकारी और निजी अस्पताल में इलाज नही मिल रहा है। ग्रामीण लक्षण होने के बाद भी टेस्ट नहीं करवा पा रहे हैं। इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। कस्बा निवासी आदित्य शर्मा का कहना है कि सरकारी अस्पताल में हो टेस्ट में गड़बड़ी की जा रही है। जांच रिपोर्ट 7 दिन में आ रही है।
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केवल मजबूरी में अस्पताल जा रहे संक्रमित

जेवर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं लचर हैं। जिस कारण बीमार लोग टेस्ट कराने के बाद घर पर ही इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं। स्वयं को होम आइसोलेट कर रहे हैं। हालात खराब होने पर ही घर से अस्पताल जा रहे हैं। जेवर में केवल दो निजी अस्पताल हैं। उनके अलावा खुर्जा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, अलीगढ़, मथुरा के अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा का रुख करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की माने तो 90 प्रतिशत लोग संक्रमण के बाद होम आइसोलेशन में ही पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं।

17 से अधिक लोगों की हो चुकी है मौत
कोरोना से रबूपुरा, भाईपुर, शाहपुर, पचोकरा, रौनीजा, आछेपुर आदि गांवों में 17 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि अधिकांश लोगों ने कोरोना की जांच नहीं कराई थी, लेकिन ज्यादातर बुखार से पीड़ित थे। उनको सांस लेने में परेशानी हो रही थी। इन हालातों में भी कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र पर वैक्सीन और कोरोना की जांच सीमित है। बीमारों के उपचार का यहां कोई प्रबंध नहीं है। लोग झोलाछाप से उपचार कराने को मजबूर हैं। 
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