कोरोना और लॉकडाउन ने रेस्तरां की कमर तोड़ दी है। पिछले साल से अभी तक 30 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो चुके है। इनमें कई नामी फूड चेन भी शामिल हैं। अभी 600 रेस्तरां ने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। ऐसे में उम्मीद है कि बंद होने वाले रेस्तरां की संख्या में इजाफा होगा। हालांकि, विभाग ने नवीनीकरण के लिए छह माह का अतिरिक्त समय दिया है।
जिले में हजारों छोटे-बड़े रेस्तरां हैं। सभी को जिला खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस लेना जरूरी है। पिछले साल एक हजार से अधिक रेस्तरां ने लाइसेंस लिया हुआ था, लेकिन कोरोना की दस्तक और लॉकडाउन में करीब 200 रेस्तरां बंद रहे। कई माह बंद होने के बाद भी संचालकों को किराया और कर्मचारियों के वेतन के रूप में लाखों रुपये देने पड़े। विभाग में इस साल करीब 800 रेस्तरां पंजीकृत हैं।
इन्हें मार्च तक लाइसेंस का नवीनीकरण कराना था, लेकिन किसी ने नहीं कराया। इसके बाद विभाग ने छह माह का अतिरिक्त समय दिया है, लेकिन अभी 600 से अधिक संचालकों ने नवीनीकरण नहीं कराया है। विभागीय अफसरों का कहना है कि मॉल और मुख्य मार्केट के संचालक काफी परेशान हैं। उन्हें किराया और कर्मचारियों का वेतन देना पड़ा। ऐसे में काफी संचालकों ने रेस्तरां बंद कर दिए हैं।
दो से तीन लाख का आ रहा था खर्च
जिले में एक नामी फूड चेन के तीन रेस्तरां थे, जो पिछले साल बंद रहे। संचालक ने किसी तरह पैसा एकत्रित कर फिर से इन्हें शुरू किया, लेकिन इस बार के लॉकडाउन ने हालत खराब कर दी। हर माह दो से तीन लाख का किराया व वेतन की मार पड़ रही थी। इससे उन्होंने रेस्तरां बंद कर दिया है।
कोरोना और लॉकडाउन से रेस्तरां कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ा है। काफी बंद हो चुके हैं। संचालकों को लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के लिए छह माह का अतिरिक्त समय दिया गया है।
- संजय शर्मा, जिला अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग