ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा के नगला पदम सिंह गांव में परिवार के पांच सदस्यों की मौत का कारण नूडल का सेवन बताया गया लेकिन मौके से मिले नूडल के रैपर पर एक्सपायरी डेट वैध मिली है। घर से चिप्स, नूडल, किशमिश और बिस्कुट के रैपर मिले हैं। चिप्स और नूडल की पैकिंग व एक्सपायरी डेट मिली सही है।
ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा के नगला पदम सिंह गांव में एक परिवार के पांच सदस्यों की मौत के मामले में घर से नूडल, चिप्स, किशमिश और बिस्कुट के खाली रैपर मिले हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नूडल और चिप्स के रैपर पर दर्ज पैकिंग और वैधता की तारीख सही मिली है। मौके पर जांच के लिए कोई खाद्य पदार्थ उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग नमूना नहीं ले सका। पुलिस ने रैपर अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं।
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, घर से सैम ब्वाय कंपनी के 10-10 रुपये वाले नूडल के दो रैपर मिले। इन पर पैकिंग की तारीख 26 जुलाई 2026 और इस्तेमाल की वैधता 25 अप्रैल 2027 तक दर्ज थी।
बेबो टोमैटो फ्लेवर चिप्स और हल्दीराम सॉल्ट चिप्स के एक-एक रैपर की जगह दो चिप्स के रैपर मिलने की जानकारी दी गई है। बेबो चिप्स पर पैकिंग की तारीख 14 सितंबर 2026 और वैधता 13 जनवरी 2027 तक दर्ज थी।
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परिवार के पांच सदस्यों की मौत के बाद जांच के लिए पहुंची पुलिस
- फोटो : पीटीआई
वहीं, हल्दीराम चिप्स की पैकिंग 18 अगस्त 2026 को हुई थी और इसकी वैधता 16 दिसंबर 2026 तक थी। अधिकारियों ने बताया कि किशमिश और गुड-डे बिस्कुट के रैपर का वह हिस्सा नहीं मिला, जिस पर वैधता की तारीख दर्ज होती है। इसलिए इन उत्पादों की तारीखों की पुष्टि नहीं हो सकी।
घर के अंदर एक बर्तन में करीब आधा कप चाय मिली, जिसे पुलिस ने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। एक अन्य गंदे बर्तन के बारे में नूडल बनाने में इस्तेमाल होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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मृतक लड्डू उर्फ साक्ष की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, टीम को सूचना मिलते ही मौके पर भेजा गया था, लेकिन वहां कोई खाद्य पदार्थ नहीं मिला, जिसका नमूना लिया जा सके। अब खाद्य सामग्री के रैपर और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर मामले में आगे की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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परिवार के पांच सदस्यों की मौत के बाद जांच के लिए पहुंची पुलिस
- फोटो : पीटीआई
बर्तन में मिली चाय, फॉरेंसिक को भेजी
घर के अंदर एक बर्तन में चाय मिली है। बर्तन में करीब आधा कप चाय थी। पुलिस ने उसे कब्जे में लेकर फॉरेंसिंक जांच के लिए भेजा है। वहीं एक बर्तन गंदा मिला है। उसमें नूडल बनाने की आशंका है।
विसरा जांच में लग सकते हैं 21 दिन
नगला पदम सिंह गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का कारण जानने के लिए विसरा जांच का इंतजार है। पोस्टमार्टम के बाद सुरक्षित किए गए नमूने लखनऊ स्थित फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। रिपोर्ट आने में करीब 21 दिन लग सकते हैं।
इसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मौतों की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी के अनुसार, नगला पदम सिंह मामले में विसरा के नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे जाएंगे।
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शवों को लेकर जाती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रिपोर्ट आने में करीब 21 दिन लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि विसरा जांच से शरीर में किसी जहरीले पदार्थ, दवा या अन्य रासायनिक तत्व की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलती है। जांच के निष्कर्षों का पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के साथ मिलान किया जाएगा। इसके बाद ही पांचों की मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रबूपुरा में दो बच्चों की मौत की घटना भी आई याद
इस घटना ने जून में रबूपुरा कस्बे के शांतिनगर मोहल्ले में दो बच्चों की मौत के मामले की याद ताजा कर दी है। सात और आठ जून को पास्ता खाने के बाद आठ वर्षीय दीपांशी और पांच वर्षीय प्रशांत की तबीयत बिगड़ गई थी। उल्टी होने पर दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
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परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद जमा भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बच्चों की मां रूबी की हालत भी गंभीर हो गई थी। उन्हें ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस मामले में भी शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई थी। बच्ची का विसरा जांच के लिए सुरक्षित किया गया था। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
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परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहले सामने आए मामले
मार्च 2024: महाशिवरात्रि के दौरान कुट्टू के आटे से बने खाद्य पदार्थ खाने के बाद ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित एक निजी हॉस्टल के 76 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई थी। इसी दौरान नोएडा के बरौला गांव में भी कुट्टू के आटे से बना भोजन खाने के बाद 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। दोनों घटनाओं में कुल 93 लोग प्रभावित हुए थे।
मई 2024: ग्रेटर नोएडा के टेक जोन-4 स्थित एक फूड ज्वाइंट से मोमोज खाने के बाद छह लोगों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। इनमें से दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सितंबर 2024: ग्रेटर नोएडा के ओमिक्रॉन क्षेत्र में मोमोज खाने के बाद 14 लोगों को जिम्स में भर्ती कराया गया था। इनमें पांच बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें हालत बिगड़ने पर आईसीयू में रखना पड़ा था।
मई 2025: ग्रेटर नोएडा के अल्फा-1 में मोमोज खाने के बाद एक ही परिवार के चार सदस्य बीमार पड़ गए थे। इनमें एक महिला और उसके तीन बच्चे शामिल थे।
फरवरी 2026: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई सोसाइटियों में कुट्टू का आटा खाने के बाद लोगों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आई थीं।
मार्च 2026: दादरी क्षेत्र में मोमोज खाने के बाद एक ही परिवार के नौ सदस्यों समेत कुल 10 लोग बीमार हो गए थे।
परिवार के पांच लोगों की मौत के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
टीम को तत्काल मौके पर भेजा गया लेकिन वहां पर कोई खाद्य पदार्थ नहीं मिला। इस कारण नमूना नहीं लिया जा सका। जिन खाद्य पदार्थों के रैपर मिले है, उनकी वैधता सहीं मिली है। पुलिस स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। -सर्वेश मिश्रा, सहायक आयुक्त खाद्य-2