चरखी दादरी। दादरी जिले में वायु गुणवत्ता लगातार चिंताजनक स्तर पर पहुंच रही है। ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप-3) लागू होने के बावजूद धरातल पर इसका असर नहीं दिखाई दे रहा है। निर्माण सामग्री से भरे खुले ट्रक, उड़ती धूल, जारी निर्माण कार्य और खनन गतिविधियों पर ढिलाई ने शहर की हवा और अधिक जहरीली बना दी है। स्थिति यह है कि शुक्रवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 330 के आसपास दर्ज किया गया जिसके कारण सुबह से शाम तक स्मॉग की चादर छाई रही और लोग सांस व आंखों से जुड़ी समस्याओं से जूझते रहे। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से न तो सख्ती से चेकिंग की जा रही है और न ही नियमों को लागू करने में सख्ती दिखाई जा रही है।
धूल उड़ाते दौड़ रहे भारी वाहन
ग्रैप-3 के तहत निर्माण सामग्री से भरे वाहनों को ढकना जरूरी है, लेकिन दादरी में इसका पालन कहीं नजर नहीं आता। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर बाहरी बाईपास रोड तक रोड़ी, मिट्टी और सीमेंट से लदे वाहन धूल के गुब्बार उड़ाते बेतहाशा दौड़ रहे हैं। सड़कों के किनारे मिट्टी के ढेर लगे हैं, जो हल्की हवा में भी धूल बनकर उड़ने लगते हैं।
दिखावे के तौर पर हो रहा पानी का छिड़काव
ग्रैप-3 के नियमों में सबसे अहम है धूल उड़ने से रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव किया जाए, लेकिन शहर में यह केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। नगर परिषद की ओर से मुख्य सड़कों पर कभी-कभार पानी का छिड़काव किया जाता है। इससे दिनभर सड़कों पर धूल उड़ती रहती है।
क्रशर, माइनिंग पर लगाई थी रोक
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से मंगलवार को क्रशर और खनन गतिविधियों को बंद करने के आदेश जारी किए गए थे। साथ ही जोन से वाहनों में निर्माण सामग्री भरने पर भी रोक लगाई गई थी। यह कदम सही दिशा में था, लेकिन नियमों का पालन गंभीरता से नहीं हो रहा है। कई क्षेत्रों में अभी भी मिट्टी और निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहन चलते हुए दिख रहे हैं।
स्वास्थ्य पर बढ़ रहा खतरा
एक्यूआई 330 के आसपास बने रहने से स्पष्ट है कि हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण अत्यधिक मात्रा में मौजूद हैं। चिकित्सकों के अनुसार इस स्तर की हवा बुजुर्गों, बच्चों और पहले से दमा, एलर्जी या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक होती है। अस्पतालों में पिछले एक सप्ताह से सांस की तकलीफ, खांसी, जुकाम और आंखों की जलन के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
ग्रैप-3 में इन कार्यों पर होती है पाबंदी
ग्रैप-तीन के दौरान गैर-जरूरी निर्माण कार्य, मिट्टी खोदना, पाइलिंग, रेडी-मिक्स कंक्रीट संयंत्रों का खुले में संचालन, कच्ची सड़कों पर रेत व सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री के परिवहन पर पाबंदी, स्टोन क्रशर, खनन व स्वच्छ ईंधन से नहीं चलने वाले हॉट-मिक्स संयंत्र बंद करना, आपातकालीन व आवश्यक सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर सेट पर पाबंदी होती है। इनके अलावा खुले में कचरा जलाने पर भी रोक होती है।
वर्जन
ग्रैप-3 के नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए टीमें बनाई गई है। जो भवन निर्माण, वाहनों के आवागमन, कूड़ा जलाने आदि पर नजर रख रही है। टीम की ओर से निरंतर कार्रवाई जारी है। सड़कों पर पानी का छिड़काव करवाया जा रहा है।- सुनील श्योराण, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दादरी।