नारनौल। भावांतर के तहत मंडियों में की जा रही बाजरे की सरकारी खरीद महज खानापूर्ति बनकर रह गई है।
खरीद अधिकारी बाजरा खरीदना तो दूर बाजरे की गुणवत्ता जांचने के लिए भी मंडियों में नहीं पहुंच रहे। इस कारण किसान 1800 से 1900 रुपये के दाम पर बाजरा व्यापारियों को बेच रहे हैं। खरीद शुरू हुए 20 दिन बीत चुके हैं और बाजरे की गुणवत्ता खराब बताकर सरकारी खरीद के तहत बाजरा नहीं खरीदा गया है। इस कारण किसान व्यापारियों द्वारा लगाई जा रही बोली में बाजरे की फसल बेच रहे हैं।
व्यापारी अच्छी गुणवत्ता वाले बाजरे को भी कम भाव पर खरीद रहे हैं और किसान एमएसपी से 300 से 400 रुपये कम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।
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बाजरे की आवक में बढ़ोतरी :
मंडियों में बाजरे की आवक में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। शनिवार को नारनौल में 637, नांगल चौधरी में 41 और अटेली में 772 गेटपास जारी किए गए। नारनौल में 19035, नांगल चौधरी में 1332 और अटेली में 21176 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है। नारनौल में 9845, नांगल चौधरी में 1096 और अटेली में 19891 क्विंटल बाजरे की खरीद व्यापारियों ने की है।
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सितंबर के मध्य में 2250 रुपये में खरीद रहे थे व्यापारी
पहले यह निर्धारित था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये पर बाजरे की सरकारी खरीद होगी। उस दौरान व्यापारी बाजरे को 2250 रुपये के भाव पर खरीद रहे थे लेकिन भावांतर खरीद के तहत खराब गुणवत्ता बताकर बाजरे की सरकारी खरीद नहीं होने पर अब व्यापारी भी कम दाम पर बाजरा खरीद रहे हैं।
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सुबह 9 बजे बाजरा लेकर मंडी पहुंचा था लेकिन दोपहर तक खरीद अधिकारी मंडी में बाजरे की जांच के लिए नहीं पहुंचे। व्यापारियों द्वारा लगाई गई बोली में अपना बाजरा 1921 रुपये के भाव पर बेचा।-वेद प्रकाश, किसान, गांव गहली
एमएसपी से कम पर बाजरा बेचना पड़ रहा है। सरकार से अपील है कि खरीद हुए मूल्य पर भावांतर दिया जाए ताकि किसान अपनी फसल को उचित दाम पर बेच सकें।-नवीन, युवा किसान, गांव दनचौली
वर्जन :
सभी मंडियों में बाजरे की खरीद के लिए अधिकारी व कर्मचारी हैं। नियमित बाजरे के नमूने लिए जा रहे हैं लेकिन गुणवत्ता मानक पर खरा नहीं उतरने के कारण सरकारी खरीद नहीं की जा रही।
प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, हैफेड,नारनौल।