शासन ने ग्रेनो प्राधिकरण के 15 और कर्मियों को दी प्रतिकूल प्रविष्टि
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट में औद्योगिक जमीन का लैंडयूज बदलकर बिल्डरों को आवंटित करने के मामले में प्राधिकरण के 15 अफसरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है। शासन से इन अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। अब तीन साल तक इनकी पदोन्नति नहीं हो सकेगी। इससे पहले भी दो अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई थी।
दरअसल, बसपा शासनकाल में ग्रेटर नोएडा वेस्ट में किसानों से जमीन अर्जेंसी क्लाज लगाकर अधिगृहीत की गई। इस पर उद्योग लगाने की योजना थी। बाद में उसका लैंडयूज बदलकर बिल्डरों को आवंटित कर दी गई। करीब 374 हेक्टेयर जमीन का लैंडयूज बदला गया था। बिल्डरों को जमीन आवंटित करने पर किसान हाईकोर्ट चले गए। नवंबर 2011 में हाईकोर्ट ने इसके दोषी अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया। इस बीच सपा की सरकार बनी और उस समय के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य संजय अग्रवाल ने इसकी जांच की। इस गड़बड़ी में कुल 26 अधिकारियों के नाम सामने आए। उन्होंने कार्रवाई की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट शासन को सौंप दी। सपा शासनकाल में जिन जमीनों का लैंडयूज बदला गया था उसे शामिल करते हुए ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2021 को मंजूरी दे दी गई। इससे यह मामला कमजोर पड़ गया और कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद भाजपा की सरकार बनने पर जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने मामला सदन में उठाया, जिस पर सभी 26 अधिकारियों को चार्जशीट दी गई, लेकिन जवाब आने पर सात बरी हो गए। उनकी कमी नहीं मिली।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक , 19 अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई, जिसमें से दो अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि पहले ही दे दी गई थी। 15 अधिकारियों व कर्मचारियों को अब प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। दो अधिकारी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की नौकरी छोड़ चुके हैं। प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने 15 कर्मियों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि का पत्र शासन से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आने की पुष्टि की है।