पुलिस के अनुसार, गांव में कई महिलाएं पहले भी उनके संपर्क में आ चुकी थीं, लेकिन परिजनों के विरोध और स्थानीय लोगों की सतर्कता के चलते योजना सफल नहीं हो पाई थी। इस बार स्थानीय लोगों ने जब उन्हें संदिग्ध गतिविधि करते देखा, तो पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
सहजनवां थानाक्षेत्र में महिलाओं को लालच देकर धर्मांतरण कराने की कोशिश के आरोप में जेल भेजी गईं दो महिलाओं की जांच अब आर्थिक और नेटवर्क कड़ी तक पहुंच गई है। पुलिस अब आरोपी महिलाओं के बैंक खातों, मोबाइल ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल खंगालने में जुटी है। जांच में अब तक यह संकेत मिले हैं कि धर्मांतरण के इस खेल में शहर के बाहर से फंडिंग हो रही थी।
विज्ञापन
सहजनवां पुलिस ने बीते 29 सितंबर को महिलाओं को धर्मांतरण कराने की कोशिश के मामले में लक्ष्मी यादव और रोशनी के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद दोनों को जेल भिजवा दिया था। साथ ही पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों महिलाओं के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) में कई संदिग्ध नंबर मिले हैं, जिनमें मध्यप्रदेश और मुंबई के नंबर प्रमुख हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी महिलाएं मध्यप्रदेश और मुंबई में रहने वाले कुछ पादरियों से नियमित संपर्क में थीं और उनसे बात करने के बाद ही इलाके में धार्मिक सभा या मीटिंग आयोजित करती थीं।
सहजनवां थाना प्रभारी महेश चौबे ने बताया कि आरोपी महिलाओं से पूछताछ में पता चला है कि वे गांव की गरीब और अशिक्षित महिलाओं को आर्थिक मदद, दवा और शिक्षा का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करती थीं। महिलाओं को इसके लिए रुपये कहां से आते थे।
इसे जानने के लिए पुलिस ने अब दोनों महिलाओं के बैंक खातों की डिटेल मांगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रुपये किस स्रोत से और किसके जरिये आता था। पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि राज्य के बाहर तक फैला हुआ संगठित गिरोह है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को टारगेट बनाता है।
सहायता के बदले ईसाई धर्म अपनाने का देती थीं सलाह
जांच में यह भी पर्दाफाश हुआ है कि गिरफ्तार महिलाएं सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवी संगठन के सदस्य बनकर गांवों में जाती थीं। वहां वे गरीब महिलाओं से मुलाकात कर उनकी जरूरतों का पता लगातीं और फिर सहायता के बदले ईसाई धर्म अपनाने की सलाह देती थीं।
पुलिस के अनुसार, गांव में कई महिलाएं पहले भी उनके संपर्क में आ चुकी थीं, लेकिन परिजनों के विरोध और स्थानीय लोगों की सतर्कता के चलते योजना सफल नहीं हो पाई थी। इस बार स्थानीय लोगों ने जब उन्हें संदिग्ध गतिविधि करते देखा, तो पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
आरोप गंभीर हैं। बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल से धर्मांतरण नेटवर्क के आर्थिक स्रोत और बाहरी संपर्कों की जांच की जा रही है। यदि किसी बड़े गिरोह की संलिप्तता पाई जाती है तो राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस फंडिंग के स्रोत और धर्मांतरण के संभावित लाभार्थियों की पहचान पर काम कर रही है: जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी नार्थ