पिछले महीने मंडियों में खराब आलू को रंगकर बेचने का मामला सामने आया था, तब शासन स्तर से इसकी निगरानी शुरू कराई गई थी। तब महेवा के अलावा शहर के अन्य फुटकर बाजारों में भी जांच हुई थी। उस समय धंधेबाजों ने काम बंद कर दिया, लेकिन अब दोबारा वही खेल शुरू कर दिया है।
कानपुर, कन्नौज और उन्नाव से आ रहे रंगे लाल आलू की वजह से महेवा मंडी के कई पल्लेदार बीमार हो गए हैं। ट्रक से आलू उतारने के बाद केमिकल की वजह से इन पल्लेदारों के शरीर पर दाने निकल गए थे, जिसका इलाज कराने की वजह से उन लोगों ने काम छोड़ दिया है।
विज्ञापन
मंडी में अन्य मजदूर भी ट्रकों से आलू उतारने में आनाकानी करने लगे हैं। इसकी जानकारी होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने सोमवार को चार दुकानों से आलू की सैंपलिंग भी कराई है। महेवा मंडी में करीब एक महीने से रंगा लाल आलू आ रहा है। बाराबंकी से लेकर उन्नाव तक कोल्ड स्टोरेज में पड़े खराब आलू को चमकाने के लिए धंधेबाज केमिकल से रंगकर इस आलू की पूर्वांचल की मंडी में भेज रहे हैं।
महेवा की मंडी में तीन बड़े कारोबारियों की दुकानों पर ट्रकों से ऐसे आलू की खेप लगातार आ रही है। इन आलुओं को बोरी से उतारने वाले मजदूरों के शरीर पर दाने और खुजली होने पर मजदूरों ने काम छोड़ दिया।
अचानक मजदूरों के बीमार पड़ने और फिर गायब होने की चर्चा ने खाद्य सुरक्षा विभाग को सतर्क कर दिया। विभाग की टीम ने सोमवार सुबह मंडी की चार दुकानों से आलू के सर्विलांस सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है।
पिछले महीने जांच हुई तो कुछ दिन शांत हो गए थे धंधेबाज
पिछले महीने मंडियों में खराब आलू को रंगकर बेचने का मामला सामने आया था, तब शासन स्तर से इसकी निगरानी शुरू कराई गई थी। तब महेवा के अलावा शहर के अन्य फुटकर बाजारों में भी जांच हुई थी। उस समय धंधेबाजों ने काम बंद कर दिया, लेकिन अब दोबारा वही खेल शुरू कर दिया है।
कपड़ा रंगने वाले कलर का हो रहा इस्तेमाल
बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि आलू को ताजा और चमकदार दिखाने के लिए अधिकतर सिंथेटिक डाई, मेटनिल येलो, रोडामाइन बी, और कॉपर सल्फेट जैसे रसायनों का प्रयोग किया जाता है। यह केमिकल कपड़ा, पेंट और औद्योगिक उपयोग के लिए बनाए जाते हैं। खाद्य पदार्थों पर इसका उपयोग हानिकारक होता है।
मेटनिल येलो की वजह से लिवर और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं रोडामाइन बी का प्रयोग भी कपड़े और कागज रंगने में प्रयोग होता है। यह कैंसरजनक माना जाता है और त्वचा पर चकत्ते व जलन पैदा कर सकता है। इसके अलावा कॉपर सल्फेट का प्रयोग भी आलू को चमकदार और ताजा बनाए रखने के लिए किया जाता है। इससे पेट में जलन, उल्टी, दस्त और लिवर-हार्ट पर भी असर पड़ता है।
पाचन तंत्र पर असर पड़ता है केमिकल से
आलू केमिकल को अवशोषित कर लेता है, जिससे इसका अपना गुण खत्म हो जाता है। ऐसा आलू खाने पर एलर्जी हो सकती है। इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। कई केमिकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के कारक भी होते हैं। इसलिए सब्जियों पर किसी तरह के केमिकल का प्रयोग हानिकारक है।
मंडी में आलू को रंगकर बेचने की शिकायत पर जांच की गई है। श्रमिकों के शरीर पर दाने पड़ने की सूचना मिली है। सोमवार को चार दुकानों से आलू का सर्विलांस सैंपल लिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी: डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा