नौकरी का झांसा देकर ठगी, दो भाई और एक बहन सहित आठ गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा। साइबर सेल की टीम ने नौकरी का झांसा देकर बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आरोपी दिल्ली व गाजियाबाद मेें फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोगों को ठग रहे थे। आरोपी फर्जी वेबसाइट में रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराने के बाद उनकी सीक्रेट जानकारी हासिल कर खातों से रुपये निकाल लेते थे। पकड़े गए आरोपियों में भाई-बहन समेत पांच पुरुष व तीन महिलाएं शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, 13 मोबाइल और 20 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।
डीसीपी ग्रेटर नोएडा जोन राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बीटा-2 थाने में कुछ दिन पहले एक युवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। युवती का आरोप था कि उसे नौकरी दिलाने के नाम पर कॉल कर 13 हजार रुपये ठगे गए हैं। केस दर्ज करने के बाद खुलासे के लिए नॉलेज पार्क थाना और साइबर सेल प्रभारी बलजीत सिंह को जिम्मेदारी दी गई थी। टीम आरोपियों की तलाश में जुटी थी। रविवार को टीम को सूचना मिली कि आरोपी ग्रेटर नोएडा में कॉल सेंटर खोलने के लिए जगह की तलाश करने आए हैं। इसी दौरान टीम ने दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के दिलशाद एक्सटेंशन-2 निवासी भाई आनंद डडवाल व हेमंत डडवाल, भोपुरा गाजियाबाद के अभिषेक सिंह, जसोला नई दिल्ली के सम्राट, बुराड़ी दिल्ली के निखिल शुक्ला के रूप में हुई है। इनके अलावा तीन अन्य युवतियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक आनंद और हेमंत की सगी बहन भी है। तीनों ही कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे।
49 रुपये का झांसा देकर करते थे हजारों की ठगी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी शुरू में 49 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर अपनी फर्जी वेबसाइट में जमा कराते थे। इससे रुपये जमा करने वाले के खाते की सीक्रेट जानकारी, पिन व ओटीपी आरोपी हासिल कर रुपये निकाल लेते थे।
नौकरी कर खुद चलाने लगा फर्जी कॉल सेंटर
हेमंत पहले फर्जी कॉल सेंटर में नौकरी करता था। आरोपी ने लगभग पांच साल तक नौकरी की थी। एक साल पहले आरोपी ने अपना वसुंधरा में कॉल सेंटर खोल लिया और अन्य आरोपियों को भी शामिल कर लिया। इसके बाद आरोपी ने दिल्ली कॉल सेंटर खोलकर ठगी शुरू की।
डाटा कैसे पहुंचता है जांच में जुटी पुलिस
आरोपी नौकरी की वेबसाइटों पर आवेदन करने वाले लोगों का डेटा चोरी कर बेरोजगारों को ठगते थे। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर आरोपियों के पास नौकरी वेबसाइट से डाटा कैसे पहुंचता था।