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Noida News: युद्ध की मार झेल रहे उद्यमी अब श्रमिकों को रोकने में जुटे

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युद्ध की मार झेल रहे उद्यमी अब श्रमिकों को रोकने में जुटे

-औद्योगिक सेक्टर साइट-बी में आईईए ने इंडियन ऑयल के साथ शिविर लगाकर बांटे सिलिंडर
-शिविर में 200 से अधिक श्रमिक पहुंचे पर पहले दिन 100 को ही मिला 5 किग्रा वाला सिलिंडर
-आज भी लगेगा शिविर, अन्य उद्यमी संगठन भी मैदान में उतरे, तेल कंपनियों से कर रहें संपर्क
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध की मार झेल रहे उद्यमी अब श्रमिकों को रोकने में जुटे हैं। गैस नहीं मिलने के कारण श्रमिक पलायन कर रहे हैं। इस पर इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (आईईए) ने एक तेल कंपनी के साथ मिलकर श्रमिकों को रोकने की पहल कर छोटे गैस सिलिंडर उपलब्ध करा रही हैं। पहले दिन 100 से अधिक श्रमिकों को सिलिंडर दिया गया। हालांकि सिलिंडर लेने पहुंचने वाले श्रमिकों की संख्या 200 से अधिक रही थी। उधर अन्य उद्यमी संगठनों ने भी तेल कंपनियों से संपर्क किया है।

देश में इस समय गैस की किल्लत चल रही है। एलपीजी गैस सिलिंडर के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइन लग रही हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिलने के कारण उद्योगों में भी उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम हो गया है। साथ ही श्रमिकों को भी गैस नहीं मिल रही है। वो खाना नहीं बना पा रहे हैं। इस कारण पलायन करने को मजबूर हैं। उत्पादन कम होने के साथ श्रमिकों के कंपनी छोड़कर जाने से उद्यमियों पर दोहरी मार पड़ रही है।
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आईईए ने इंडिया ऑयल के सहयोग से सेक्टर साइट-बी स्थित कार्यालय पर शिविर का आयोजन किया। जहां 5 किग्रा के छोटे सिलिंडर का श्रमिकों में वितरण किया गया। आईईए के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि कंपनियों के कर्मचारी काम छोड़कर अपने घर लौट रहे हैं। इससे उद्योगों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में श्रमिकों को लिए 5 किग्रा का सिलिंडर उपलब्ध कराया गया है। पहले दिन शिविर में 100 से अधिक श्रमिकों को 5 किग्रा का सिलिंडर दिया गया। इसके लिए सभी कंपनियों से सूची मांगी गई थी। हालांकि मौके पर 200 से अधिक श्रमिक पहुंचे थे। बुधवार को भी शिविर लगेगा।

परिवार में छह सदस्य हैं। गैस कनेक्शन भी है, लेकिन 45 दिन बाद सिलिंडर मिलेगा। गैस खत्म होने के बाद लकड़ी से चूल्हा जला रहे थे, लेकिन उससे खाना बनाना संभव नहीं है। अब गैस मिली है तो राहत मिलेगी। गैस के बिना उसके काफी साथी अपने गांव लौट चुके हैं। -सतेंद्र तिवारी, इकोटेक-1


मूलरूप से असम का रहने वाला हूं। कनेक्शन नहीं है। गैस के बिना यहां परिवार के साथ रहना मुश्किल है। उसके काफी साथी अपने गांव लौट चुके हैं। अगर गैस नहीं मिली तो वापस जाना पड़ेगा। -दिलदार हुसैन, देवला


5 किग्रा सिलिंडर का कनेक्शन है, लेकिन उसके साथ चार दोस्त रहते हैं। सिलिंडर खत्म हो चुका है। एक जगह 250 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से दो किग्रा गैस भी मिली है। अब कुछ दिन की राहत है। -अजय, दादरी
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काफी दिन से गैस के लिए परेशान था। अब गैस मिली है तो राहत है। गैस के बिना यहां पर रहना मुश्किल है। चूल्हे जलाने का विकल्प भी यहां नहीं है। -अजय, श्रमिक
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