फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: नशे की खेप पर साड़ी का पर्दा, 25 लाख गांजे के साथ दो गिरफ्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
- साड़ियों की तह में गांजा तस्करी करने वाले गिरोह के दो बदमाशों को पकड़ा
विज्ञापन

- आरोपियों के पास से 25 लाख रुपये कीमत का गांजा और 39 साड़िया बरामद

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। साड़ियों की तह में छिपाकर गांजे की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली सेक्टर-20 पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से 37 किलो 696 ग्राम गांजा बरामद किया गया है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रहीं 39 साड़ियां भी बरामद की हैं।

नोएडा जोन की एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि पुलिस की टीम ने सूचना के आधार पर सेक्टर-17 में दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अयोध्या निवासी शुभम पाठक और शिवम दूबे के रूप में हुई। दोनों वर्तमान में दिल्ली के मयूर विहार क्षेत्र में रह रहे थे। शुभम पाठक इस पूरे नेटवर्क का सरगना है। वह पिछले दो से तीन वर्षों से नशे के कारोबार में सक्रिय था और ओडिशा व आंध्रप्रदेश से पार्सल के माध्यम से गांजा मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करता था। आरोपी गांजे की तस्करी के लिए साड़ी का इस्तेमाल करता था।
विज्ञापन

गांजे को साड़ियों की पैकिंग के भीतर इस तरह छिपाया जाता था कि वह सामान्य कपड़ों के पार्सल जैसा दिखाई देता था। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि शुभम विभिन्न कूरियर कंपनियों के माध्यम से माल मंगवाता था। पार्सल के गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही वह फोन के जरिए संपर्क कर उसे अपने कब्जे में ले लेता था। बरामद गांजे की गुणवत्ता बहुत अच्छी है और विशेष किस्म का गांजा बताया जा रहा है।
विज्ञापन


कई राज्यों में फैला है नेटवर्क : पुलिस पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में है। यूपी, दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल व ओडिशा तक इस गिरोह के लोग काम कर रहे हैं। दोनों आरोपी बीए पास हैं। दोनों के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर मुकदमे पहले से दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि ये आरोपी गांजा सप्लाई के लिए सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्स एप ग्रुपों का सहारा लेते थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें