अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल की अदालत ने वर्ष 2018 में एक छह वर्षीय नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो आरोपियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों पर 12 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर और अधिक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार पिनगवां थाना के एक गांव में बीते 20 नवंबर 2018 को शादी समारोह था, जिसे देखने के लिए गांव की छह वर्षीय मासूम अपने भाई के साथ दोपहर 12 बजे जा रही थी। इसी दौरान गांव के ही सुक्का उर्फ जिलशाद व प्रीतम उर्फ पित्ती ने बच्ची को दो रुपये देकर बुला लिया और उसे उठाकर सुनसान जगह ले गए। इसी दौरान पीड़िता के भाई ने बचाने का प्रयास किया तो उसको मारपीट कर भगा दिया और बच्ची के साथ दोनों ने दुष्कर्म किया। बाद में बच्ची रोते हुए घर पहुंची और सारी बात परिजनों को बताई। पीड़ित बच्ची के परिजनों ने पिनगवां थाने में पहुंचकर शिकायत दी।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। उस वक्त आरोपी नाबालिग थे और पढ़ाई कर रहे थे। तभी से यह मामला नूंह की अतिरिक्त सत्र न्यायधीश नरेंद्र पाल के स्पेशल पाक्सो कोर्ट में चल रहा था। अदालत ने एक सितंबर को अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। तीन सितंबर को अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 20-20 साल का कठोर कारावास सुनाया है। पीड़िता नाबालिग की तरफ से अजय कुमार मित्तल एडवोकेट ने पैरवी की और माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत किया।