गांव बबरोतिया में गंगा नदी के पानी से जलमग्न हुई फासलें। संवाद
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सांकरा क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर आबादी में दस्तक देने के बाद धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन गंगा के पानी ने फसलों को लगभग नष्ट कर दिया है। पशु चारा भी नष्ट हो गया है। किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं।
नरौरा बैराज से गंगा में अब कम पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे जलस्तर में गिरावट आना शुरू हो गया है। सोमवार को नरौरा बैराज से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे जलस्तर बढ़ा नहीं है, इससे ग्रामीणों ने राहत महसूस कर रहे है लेकिन खेतों में पानी अभी भी भरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजरा और मक्का की फसल तो पहले ही नष्ट हो चुकी है लेकिन अब बची-खुची धान की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। गांवों के सहारे बुर्जी-बिटौरों में रखा भूसा भी गीला हो गया है, जिसके सड़ने की आशंका है। पशुओं के लिए चारा बाजार से खरीदना पड़ रहा है। ज्ञात रहे दो दिन पहले गंगा खतरे के निशान तक पहुंच गई थी, जिससे किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गईं और पानी आबादी की ओर बढ़ने लगा था।
गंगा नदी के पानी से सांकरा क्षेत्र की फसलें पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर हैं। कालीचरन, रुस्तमनगर
गंगा के पानी से धान की फसल पूरी तरह जलमग्न होने से नष्ट हो गई है। रामरतन, गांव हारनपुर कलां
गन्ना और धान की फसल को गंगा के पानी से इस बार काफी नुकसान हुआ है। देवेंद्र गांव बबरोतिया।