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Noida News: आम्रपाली की परियोजना में फंड की कमी होगी दूर, अधूरे निर्माण होंगे पूरे

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आम्रपाली की परियोजना में फंड की कमी होगी दूर, अधूरे निर्माण होंगे पूरे
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- सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर की ग्रुप हाउसिंग परियोजना में कोर्ट रिसीवर को बचे हुए एफएआर के उपयोग की दी हरी झंडी
- सात परियोजनाओं में कोर्ट रिसीवर अतिरिक्त एफएआर को बेचकर फंड इकट्ठा करने की कर रहे कोशिश
- नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की आपत्ति कोर्ट ने की खारिज

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली के फ्लैट खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने बचे हुए फ्लोर एरिया रेशिया (एफएआर) के उपयोग की अनुमति कोर्ट रिसीवर को दे दी है। एफएआर को बेचकर या अतिरिक्त निर्माण कर करीब 800 से 1200 करोड़ रुपये का फंड जुटाया जा सकेगा। इस पैसे से अधूरे निर्माण पूरे हो सकेंगे। इसका फायदा हजारों फ्लैट खरीदारों को मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अजय रस्तोगी एवं जस्टिस बेला त्रिवेदी की खंडपीठ ने अपने आदेश में नोएडा-ग्रेनो प्राधिकरण की आपत्तियों को खारिज करते हुए कोर्ट रिसीवर को बचे हुए एफएआर के उपयोग की हरी झंडी दे दी। कोर्ट रिसीवर की ओर से इसके लिए काफी दिनों से मशक्कत की जा रही थी। लेकिन प्राधिकरणों ने इस काम में अड़ंगा डाल रखा था।जानकारों का कहना है कि कोर्ट रिसीवर बचे हुए एफएआर को दूसरे डेवलपर को बेचकर करीब 800 करोड़ तक जुटा सकते हैं, जिसका उपयोग निर्माण कार्य पूरा करने के लिए हो सकेगा। इसके साथ ही इस एफएआर का उपयोग करते हुए नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) के माध्यम से नए निर्माण भी करा सकेंगे। निर्माण कराने के बाद फ्लैटों को बेचकर पैसे जुटाए जा सकेंगे। अब कोर्ट रिसीवर को फैसला करना है कि वह एफएआर का उपयोग किस तरह से करेंगे।
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बेसिक प्लान से नहीं होगी छेड़छाड़
कोर्ट ने आदेश में साफ कहा है कि बेसिक प्लान में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। फ्लैट की बुकिंग के दौरान किए गए सभी सुविधाओं के वादे को पूरा करना होगा। एफएआर का उपयोग करते हुए यह भी ध्यान रखना होगा कि ग्रीन एरिया वैसे का वैसा ही रहे। इसमें किसी तरह का निर्माण नहीं हो क्योंकि इस बाबत फ्लैट खरीदारों ने भी आपत्ति जाहिर की है।

प्राधिकरण में जमा करना होगा रिवाइज्ड प्लान
कोर्ट ने रिसीवर को दो सप्ताह में नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में रिवाइज्ड प्लान जमा कराने को कहा है। प्लान की मंजूरी के बाद ही आगे की गतिविधि हो सकेगी। यही नहीं, रिवाइज्ड प्लान जमा होने के बाद प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट को अगली कार्रवाई के बाबत सूचित भी करेगा।

आम्रपाली परियोजना के अधूरे निर्माण को पूरे करने के लिए रास्ता निकला है। परियोजना को पूरा कराने में फंड की कमी आड़े आ रही थी। अब एफएआर के उपयोग के आधार पर फंड आ सकेगा, जिससे परियोजना के काम में तेजी आएगी। इससे खरीदारों को भी काफी फायदा मिलेगा।- कुमार मिहिर, वकील, सुप्रीम कोर्ट
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यह होता है एफएआर
एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो। किसी भी परियोजना में प्राधिकरण की ओर से तय एफएआर दिया जाता है। इसके अंतर्गत उक्त जमीन पर आवंटी कितने क्षेत्र में कितने तलों का निर्माण करेगा, इसकी जानकारी मिलती है। आम्रपाली के मामले में कुछ परियोजनाओं में दिए गए एफएआर की जानकारी प्राप्त की गई है और पता चला है कि अभी इस परियोजना में निर्माण कार्य के लिए कुछ क्षेत्र बचा हुआ है। इसी की उपयोगिता के लिए कोर्ट में मामला चल रहा था। जिस पर फैसला हुआ है।
इन परियोजनाओं में बेचे जा सकेंगे एफएआर
1. आम्रपाली सिलिकॉन सिटी, नोएडा
2. आम्रपाली प्रिंसले एस्टेट, नोएडा
3. आम्रपाली लेजर वैली, ग्रेटर नोएडा
4. आम्रपाली सेंचुरियन पार्क, ग्रेटर नोएडा
5.आम्रपाली स्मार्ट सिटी डेवलपर्स, ग्रेटर नोएडा
6.आम्रपाली लेजर वैली, ग्रेटर नोएडा
7.आम्रपाली ड्रीम वैली , ग्रेटर नोएडा


आम्रपाली के प्रोजेक्ट का आंकड़ा

- 21 प्रोजेक्ट हैं आम्रपाली के

- 42 हजार खरीदारों को घर मिलने थे

- 29 हजार खरीदारों को अब भी घर मिलने बाकी

- नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में प्रोजेक्ट हैं।

- कोर्ट के आदेश पर एनबीसीसी अधूरे निर्माण को पूरा करने का कार्य कर रही है।

- कोर्ट ने इस परियोजना के लिए एक कोर्ट रिसीवर भी नियुक्त किया है।
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