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Noida News: एयरपोर्ट से परमाणु संयंत्र तक, साइबर और ड्रोन हमलों से निपटेंगे जवान

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- आईआईटी कानपुर देगा छह सप्ताह की साइबर ट्रेनिंग, बहरोड़ में बनेगा ड्रोन-एंटी ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। एयरपोर्ट, बिजली संयंत्रों और परमाणु प्रतिष्ठानों जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा में साइबर हमले और अनधिकृत ड्रोन नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। इन तकनीकी खतरों से निपटने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) अपने जवानों की विशेष टीमें तैयार करेगा। इसके लिए सीआईएसएफ ने आईआईटी कानपुर के साथ दो समझौते किए हैं। पहले समझौते के तहत साइबर सुरक्षा और दूसरे के तहत ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक पर प्रशिक्षण और शोध किया जाएगा।


सीआईएसएफ के अधिकारी विजय कुमार चहल के अनुसार, पहले समझौते के तहत आईआईटी कानपुर का सी3आईहब तीन वर्ष तक साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा। प्रत्येक बैच में सीआईएसएफ के 40 चयनित जवान शामिल होंगे। उन्हें छह सप्ताह का आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सामान्य साइबर अपराधों के बजाय विमानन, बिजली और परमाणु क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर संभावित साइबर खतरों की पहचान और उनसे निपटने की क्षमता विकसित करना है।
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प्रशिक्षण में डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर घटना की पहचान और प्रतिक्रिया, डिजास्टर रिकवरी तथा बिजनेस कंटिन्यूटी के साथ एआई और मशीन लर्निंग, डीपफेक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), क्लाउड और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी से जुड़े उभरते खतरे शामिल होंगे। जवानों को वास्तविक परिस्थितियों जैसी बहु-क्षेत्रीय संकट स्थितियों से निपटने का अभ्यास भी कराया जाएगा।
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बहरोड़ में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस



दूसरे समझौते के तहत सीआईएसएफ और आईआईटी कानपुर पांच वर्षों तक राजस्थान के बहरोड़ स्थित एमपीआरटीसी में ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करेंगे। यहां अनधिकृत ड्रोन की पहचान, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, ड्रोन फॉरेंसिक और मानवरहित प्रणालियों की साइबर सुरक्षा पर प्रशिक्षण व शोध होगा। रेडियो फ्रीक्वेंसी और माइक्रो-डॉप्लर तकनीक से ड्रोन की पहचान तथा एकीकृत काउंटर-यूएएस सिस्टम पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए सिम्युलेटर और फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं विकसित की जाएंगी।
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