जालसाजों ने छह दिन तक तीन महिलाओं को डिजिटल अरेस्ट रखा, सोसाइटी के लोगों ने छुड़ाया
दिल्ली बम धमाके से जोड़कर तीनों को डराया, जालसाजों ने खुद को एनआईए व सीबीआई अधिकारी बताया
तीन लाख की ठगी की, एक महिला सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से है सेवानिवृत
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक केपटाउन सोसाइटी के फ्लैट में साइबर जालसाजों ने तीन महिलाओं को छह दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और तीन लाख रुपये की ठगी कर ली। इसके बाद सोसाइटी के लोगों ने एओए की मदद से तीनों महिलाओं को इससे बचाया।
पुलिस ने दो लाख रुपये को फ्रीज करा दिया है। सेक्टर-74 स्थित केपटाउन सोसाइटी के एक टावर में कृषि मंत्रालय और सूचना प्रसारण मंत्रालय से सेवानिवृत्त दो बहनें रहती हैं। सूचना प्रसारण मंत्रालय से रिटायर्ड छोटी बहन की बेटी साथ रहती है और वह एमबीबीएस की छात्रा है। सूचना प्रसारण मंत्रालय से रिटायर्ड महिला अधिकारी के पास सोमवार दोपहर को इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के नाम से एक कॉल आई। कॉलर ने उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड पर एक सिम खरीदी गई है। जिसका इस्तेमाल दिल्ली में लालकिला ब्लास्ट के दौरान बातचीत के लिए किया गया है। साथ ही उन्हीं के आधार और पैन कार्ड का उपयोग कर एक बैंक खाता खोला गया, जिसमें पाकिस्तान से रकम भेजी गई है और इसी नंबर से पाकिस्तानी नंबर पर भारत के कई लोकेशन भेजे गए हैं। आरोपी उन्हें एक फर्जी स्टेटमेंट भी वॉट्सएप पर भेज दिए। इसके बाद पीड़िता की बेटी और उनकी बहन को साथ में ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपी खुद को सीबीआई अधिकारी बोलकर जांच शुरू कर दिए। दिल्ली हेडक्वाटर से अरेस्ट वारंट भी दिखाया। जांच में मदद करने की बात बोलकर उन्हें वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए बोला गया। इस दौरान तीनों महिलाओं ने तीन लाख रुपये दे दिए।
इसके बाद तीनों महिलाओं को धीरे-धीरे शक होने लगा लेकिन जालसाजों ने डराकर तीनों को अलग-अलग मोबाइल पर डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। महिला ने किसी तरह पड़ोस में रहने वाले को इशारे में बताया कि वह परेशानी में है। इसके बाद पड़ोसी ने एओए को सूचना दी। तब एओए के सुरक्षा अधिकारी व आसपास के लोग महिलाओं के पास पहुंचे और उन्हें डिजिटल अरेस्ट सेे छुड़ाया। इसके बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और अब जांच की जा रही है। एओए पदाधिकारी अरूण शर्मा ने बताया कि एओए व सोसाइटी के लोगों ने मिलकर तीनों महिलाओं को डिजिटल अरेस्ट से छुड़ाया। उन्होंने बताया कि जालसाजों ने महिलाओं को काफी डराया हुआ था। उन्होंने सोसाइटी के लोगों से अपील करते हुए कहा कि डिजिटल अरेस्ट, वीडियो कॉल पर पुलिस/सीबीआई बनकर धमकाने वाले साइबर अपराधियों से सावधान रहें। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या पैसे की मांग नहीं करती। ऐसी किसी भी कॉल को तुरंत काट दें और पुलिस और एओए को सूचित करें।
डिजिटल अरेस्ट होकर पहुंची परीक्षा हॉल तक
डिजिटल अरेस्ट की शिकार मेडिकल की छात्रा भी लगातार जालसाजों के वीडियो कॉल पर थी। इस बीच एक दिन उसे सेमेस्टर परीक्षा देने जाने था। तब वह मां के साथ फ्लैट से डिजिटल अरेस्ट होकर ही निकली और परीक्षा केंद्र तक डिजिटल अरेस्ट ही गई। परीक्षा केंद्र में घुसने के बाद उसकी मां केंद्र के बाहर वीडियो कॉल पर ही रही। जब छात्रा परीक्षा देकर निकली तब फिर से डिजिटल अरेस्ट हो गई।