अमेजन की फर्जी वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी का दिया झांसा
दिल्ली, गुरुग्राम व फतेहाबाद से तीन ठग गिरफ्तार, सरगना जॉर्जिया में मौजूद
एक खाते में एक दिन में पांच करोड़ से ज्यादा ट्रांसफर, गिरोह के सात खाते कर रहे काम
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1.18 लाख ठगे जाने पर महिला ने की शिकायत तो हुआ खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
बाहरी उत्तरी जिला साइबर सेल ने ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी दिलाने का झांसा देकर 11 हजार लोगों को ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा कर दिल्ली, गुरुग्राम और फतेहाबाद से तीन ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी चीन में बनाई अमेजन की फर्जी वेबसाइट के जरिये मोटी कमाई कर रहे थे। गिरोह सरगना चीन और दुबई के जरिए जॉर्जिया से गिरोह चला रहा है। आरोपियों ने ठगी गई करोड़ों की रकम को सात कंपनियों में ट्रांसफर किया है। ठगे गए पैसे को आरोपी ऑफशोर, क्रिप्टो, रेज़र पे और अन्य ऐप्स की मदद से भेजते थे। पुलिस ने सात खातों में 15 लाख से ज्यादा रुपये फ्रीज किए हैं। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने चीन और दुबई में पैसे निकालने में इस्तेमाल सिम कार्ड और पांच मोबाइल भी बरामद किए हैं। सरगना को पकड़ने के लिए पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, 26 सितंबर को महिला शिकायतकर्ता ने ठगी की शिकायत की थी। उसे इंस्टाग्राम पर विज्ञापन के माध्यम से अमेजन पर ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी दिलाने का लालच देकर 1.18 लाख रुपये ठगे गए थे। इसके बाद निरीक्षक रमन कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की तो पता चला कि जालसाज जिस इंस्टाग्राम आईडी का इस्तेमाल कर रहे हैं वह बीजिंग, चीन से संचालित की जा रही है। शिकायतकर्ता को अमेजन की फर्जी वेबसाइट में निवेश करवाया गया। इसके लिए व्हाट्सएप नंबर भी भारत से बाहर से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने एनपीसीआई और कोटक महिंद्रा बैंक को ईमेल लिखकर संदिग्ध लेनदेन के लाभार्थी का विवरण मांगा तो बैंक से प्राप्त जानकारी से पता चला कि पीड़ितों से पैसे जमा करने के लिए कृष्णा एंटरप्राइजेज के नाम से शेल फर्म खाते का उपयोग किया था। कोटक महिंद्रा बैंक से प्राप्त विवरणों से पता चला कि 22 सितंबर को खाते में 5.17 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। कृष्णा एंटरप्राइजेज खाते की जांच में पता चला कि पूरी राशि को 7 अलग-अलग फर्मों में भेजा गया। पैसे की हेराफेरी क्रिप्टो करेंसी के जरिए विदेशी खातों में की गई है। इसके बाद खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की तकनीकी विश्लेषण के बाद नजफगढ़ निवासी सतीश यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। उसने पूछताछ में बताया कि दुबई और जॉर्जिया में बैठे सरगना के निर्देश पर गुरुग्राम निवासी अभिषेक गर्ग ने उसे सिम दिया था। पुलिस ने आरोपी अभिषेक के मोबाइल फोन की जांच की तो मामले में संलिप्त होने का खुलासा हुआ। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। वहीं, पुलिस ने आरोपी फतेहाबाद, हरियाणा निवासी संदीप महला को बाद में खाते से विदेश में बैठे जालसाजों को रेजर पे के जरिए पैसे भेजने का सबूत मिलने पर दबोच लिया।
पेटीएम में उप प्रबंधक रह चुका है एक आरोपी
गुरुग्राम निवासी अभिषेक जॉर्जिया में बैठे सरगना से दस साल से संपर्क में है। अभिषेक पेटीएम में उप प्रबंधक रह चुका है। फिलहाल वह वित्तीय और लागत सलाहकार है। सरगना को आरोपी तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा था। नजफगढ़ निवासी सतीश दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक है। वह एजिस, इंडिया बुल्स, एयरटेल, नेट एमिड सहित अन्य नामी कंपनी में काम कर चुका है। आरोपी ने कुछ ऐप के माध्यम से सरगना के फोन को चालू खाते से जुड़े सिम से जोड़ा और विदेश में सरगना को चालू खाते के ओटीपी तक पहुंचने की सुविधा प्रदान की। वहीं, संदीप महला ने विदेश में पैसे निकालने के लिए अपने खाते ही सुविधा दी थी।
लोन धोखाधड़ी कम होने से जॉब मॉड्यूल विकसित किया
चीनी साइबर जालसाज ने ऑनलाइन पार्ट टाइम जॉब की तलाश कर रहे लोगों को धोखा देने के लिए मॉड्यूल विकसित किया था, क्योंकि एजेंसियां लगातार चीनी लोन देने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लोगों में इसे लेकर जागरूकता आने से चीनी लोन के जरिये धोखाधड़ी अब कम हो रही है। इसे देखते हुए जालसाजों ने अमेजन कंपनी की तरह एक फर्जी वेबसाइट https://mall613.com/#/pages/regist/index बना ली। वेबसाइट चीन से रजिस्टर्ड है। इसके बाद ठग फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वास्तविक अमेजन कंपनी के रूप में विज्ञापन करते थे। इसके लिए उन्हें डिजिटल मार्केटिंग की मदद से लाखों लाइक और फॉलोअर्स मिलते हैं, जिसे देखकर युवा आकर्षित होते हैं। फिर उन्हें वेबसाइट पर आईडी बनाने के लिए कहा जाता है और उत्पादों को ऑनलाइन बेचने का काम दिया जाता है। इसके बाद फर्जी तरीके से उत्पाद बेचने के नाम पर बेवकूफ बनाया जाता है। आरोपी के पास उस वेबसाइट का एडमिन एक्सेस होता है और वह कोई भी संशोधन कर सकते हैं। पीड़ित खाते में पैसे जमा होते हुए देख सकते हैं।
ऐसे की जाती थी ठगी
शिकायतकर्ता ने बताया कि 22 सितंबर 2022 को इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल करते हुए उसे ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के बारे में विज्ञापन पोस्ट मिली। चैट बॉक्स में आरोपियों ने प्रश्नों व जॉब प्रोफाइल के बारे में और संचार के लिए व्हाट्सएप नंबर मांगा। व्हाट्सएप नंबर साझा करने के बाद अज्ञात नंबर से मैसेज मिला। इसमें वैश्विक ऑनलाइन स्टोर के लिए भर्ती करने की बात कही गई थी। ऑनलाइन आसान तरीके से पैसा कैसे कमाया जाए इसके बारे में बात की गई थी। ठगों ने बताया कि दैनिक कमाई दो सौ से 8 हजार रुपये तक होगी। यदि आपके पास स्मार्ट फोन है, तो आप समय और स्थान को स्वतंत्र रूप से व्यवस्थित कर सकते हैं। फिर एक लिंक भेजा। उस लिंक पर पंजीकरण किया और एक खाता बनाया। वॉलेट में स्वागत योग्य राशि के रूप में 68 रुपये दिखाई दे रहे थे। इसके अलावा ठगों ने काम करने और कमाई करने के तरीके सीखने के लिए 200 रुपये देने को कहा। 22 सितंबर को यूपीआई आईडी में 200 रुपये का भुगतान किया। फिर इंस्टाग्राम पर ट्यूटर का लिंक दिया। ठगे ने ऐप और काम की विशेषताओं के बारे में सिखाया। इसके बाद कमाए गए पैसे को कमीशन के रूप में वापस लेने के आदेश को पूरा करने के लिए 5 कार्य सौंपे गए। उत्पाद को खरीदने के लिए रिचार्ज का विकल्प था। जब शिकायतकर्ता महिला ने रिचार्ज पर क्लिक किया तो पेटीएम से भुगतान करने का निर्देश मिला। इसके बाद महिला ने अलग-अलग यूपीआई आईडी पर अलग-अलग राशि का भुगतान किया। जब महिला ने शक जताया तो ठगों ने अमेजन कंपनी के सर्टिफिकेट के स्क्रीनशॉट भेजे। वास्तविक होने पर भरोसा हुआ तो महिला ने यूपीआई आईडी में 1.18 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। फिर शेष उत्पाद खरीदने के लिए एक और कोड भेजा, लेकिन ठगी का अहसास होने पर महिला ने पैसे नहीं भेजे।