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Noida News: फर्जी आईडी के आधार पर खुलवाते थे बैंक खाते

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- 50 हजार रुपये जमा होने के बाद बंद हो जाता था खाता
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माई सिटी रिपोर्टर



ग्रेेटर नोएडा। गिरोह फर्जी आईडी के आधार पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके लिए वह ठगी का शिकार दूसरों की आईडी लेकर उसी नाम पर फर्जी सिम कार्ड खरीदते और फिर उसी सिम पर बैंक खाता खुलवाते थे। इन खातों का उपयोग केवल ठगी की रकम मंगाने और आगे ट्रांसफर करने में किया जाता था। आरोपियों के पास से बरामद सभी सिम कार्ड प्री-एक्टिवेटेड और किसी अन्य के नाम से जारी किए गए मिले हैं। गिरोह एक आईडी पर करीब हजार क्लाइंट्स जोड़ लेता था। जिन खातों में 50 हजार रुपये से अधिक जमा हो जाते थे। उन्हें तुरंत इनएक्टिव कर दिया जाता। जिससे पकड़ में न आएं। पैसे को अलग-अलग खातों में घुमा-फिरा कर वह मास्टरमाइंड लियो द्वारा बताए खाते में ट्रांसफर कर देते। फिर एटीएम व डेबिट कार्ड के माध्यम से निकालते थे।
बीएससी पास ग्रेनो ब्रांच का सरगना :
गिरोह में शामिल पकड़े गए मुख्य आरोपी अंकित सिंह ने बताया कि वह बीएससी पास है। ग्रेनो ब्रांच का सरगना है। आरोपी पहले सिंचाई विभाग इटावा में संविदा पर कार्यरत था। नौकरी छोड़कर पत्नी कीर्ति के साथ ठगी का काम कर रहा था। हिमांशु बीएससी साइंस का तृतीय वर्ष का छात्र है। चिराग जैन, प्रथम मिश्रा, नितिन बाबू, अंश कुमार वर्मा, कीर्ति 12वीं पास हैं। हर्षित वर्मा बीएससी पास है। पुलिस की ओर से फ्लैट मालिक से डिटेल मांगी गई है कि आरोपियों ने फ्लैट को किराये पर लेते समय रेंट एंग्रीमेंट कराया कि नहीं।
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अंकित के कहने पर ग्रेनो आए हैं बाकी आरोपी :
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी फ्लैट में ठगी करने के दौरान पड़ोसियों से ज्यादा संपर्क नहीं रखते थे। पुलिस अब लियो की पहचान, बैंकिंग नेटवर्क, डिजिटल ट्रांजेक्शन और ठगे गए पैसों की ट्रेल खंगाल रही है। लियो ने व्हाट्सऐप से संपर्क के बाद अंकित को अपने गिरोह में मिलाया। फिर अंकित अन्य आरोपियों को लालच देकर ग्रेटर नोएडा लाया था। सभी को ठगी करने पर लाखों रुपये वेतन के साथ इंसेंटिव दिया जाता है। पुलिस की ओर से आरोपियों के द्वारा बनाई गई वेबसाइट को भी बंद कराया जाएगा। पुलिस की ओर से आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
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ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से हो रही ठगी :
भारत में ऑनलाइन गेमिंग बिल-2025 के तहत सभी रियल मनी गेम ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उनका प्रचार करना गैरकानूनी है। इसका उद्देश्य जुआ और सट्टेबाजी से जुड़े हानिकारक ऑनलाइन मनी गेम्स को रोकना है। उल्लंघन करनेपर 3 साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। बावजूद चोरी छिपे ऑनलाइन गेमिंग और बेंटिंग ऐप के नाम पर धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रहा है। लोग लालच में आकर बड़ी रकम डाल देते हैं। जबकि ज्यादातर ऐसे एप विदेशों से संचालित या फर्जी होते हैं।




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