डॉलर और बिटकॉइन में ट्रांजेक्शन
आरोपी गूगल मीट पर ऑनलाइन मीटिंग करते थे। जिसमें कंपनी के प्रोडक्ट जैसे सोना, हीरे और घड़ियों को खरीदने और बेचने का झांसा देकर निवेश कराते थे। लोगों को कंपनी में शामिल होने के लिए करीब 1.5 लाख रुपये देने पड़ते थे। यह रकम गूगल मीट के दौरान भेजे गए लिंक के जरिए डॉलर या बिटकॉइन में जमा कराई जाती थी। जब निवेशकों को मुनाफा नहीं मिलता था, तो आरोपियों द्वारा और प्रोडक्ट खरीदने या लोन दिलाने की पेशकश की जाती थी। जिससे पीड़ित पूरी तरह जाल में फंस जाते थे।
सेना के जवान को भी बनाते थे निशाना
आरोपियों में से कई का सेना बैकग्राउंड भी है। जिसका फायदा उठाकर यह लोग सेना के जवानों से भी संपर्क करते थे और उन्हें भी निवेश के लिए फंसाते थे। आरोपियों का कहना था कि जल्दी अमीर बनने की चाह में लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे। क्यूनेट/विहान नाम की इस कंपनी के खिलाफ दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में जांच चल रही है। इसके अलावा राजस्थान और मेघालय समेत अन्य राज्यों में भी इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।
बंगाल के युवक को ठगने के बाद दी थी धमकी
पीड़ित के भाई प्रवीण कुमार पाल ने केस दर्ज कराया था कि उनका चचेरा भाई निखिल कुमार पाल सितंबर-2024 में गांव चूहड़पुर में किराए पर रह रहा था। वहीं उसकी मुलाकात से हुई थी। आरोप है कि इन लोगों ने निखिल को बताया कि वह एक बड़ी कंपनी की फ्रेंचाइजी दिला सकते हैं। जिसमें घड़ियां, ज्वैलरी जैसे महंगे प्रोडक्ट बेचे जाते हैं और अच्छा कमीशन भी मिलता है। जितना ज्यादा पैसा लगाएगा। उतनी ही ज्यादा कमाई होगी और बदले में प्रोडक्ट भी मिलेंगे। निखिल ने आरोपियों के झांसे में आकर करीब 3.75 लाख और फिर दोबारा 3.75 लाख रुपये दिए। कुल मिलाकर साढ़े सात लाख रुपये देने के बाद न तो उसे कोई प्रोडक्ट मिला और न ही पैसे वापस हुए। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो कौशिक डांगर और उसके साथियों ने उसे जान से मारने की धमकी दे दी।