किसी बड़ी आपदा में एक साथ कई लोग अलग-अलग स्थानों पर फंसे हो सकते हैं। ऐसे में चुनौती केवल उन्हें तलाशने की नहीं, बल्कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर बचाव की प्राथमिकता तय करने की भी होती है। जीवनसेतु में पीड़ित की स्थिति, स्थान, आसपास मौजूद खतरे, तात्कालिकता और वहां तक पहुंचने से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण कर बचाव दल को प्राथमिकता तय करने में मदद देने की परिकल्पना है।
मलबे के एक तरफ जिंदगी फंसी हो और दूसरी तरफ मां, पिता या परिवार के लोग इस उम्मीद में खड़े हो कि शायद अगले ही पल उनके अपने की कोई खबर मिल जाए। बचावकर्मी मलबा हटाते रहें, लेकिन यह पता न हो कि जिंदगी की तलाश आखिर किस हिस्से में की जाए। भूकंप और भूस्खलन के साथ कई आपदाओं में कई बार यही इंतजार सबसे भारी पड़ता है। अब चार युवाओं ने इसी इंतजार को कम करने के लिए तकनीक का सहारा लेने की पहल की है। उन्होंने एआई आधारित आपदा बचाव प्रणाली जीवनसेतु को भी भावनाओं से जोड़ दिया है। यानी संकट में फंसी जिंदगी और उस तक पहुंचने वाले बचाव दल के बीच एक सेतु।
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बुद्धा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर के बीटेक तीसरे वर्ष के छात्र अमन गुप्ता ने बताया कि उनकी टीम में खुशी सिंह, शुभी शुक्ला और अरुण साहनी एयरोरेस्क्यू के तहत इस सिस्टम पर काम कर रहे है। इसकी खासियत यह है कि आपदा के बाद जहां बचावकर्मियों के लिए तत्काल पहुंचना मुश्किल होगा, वहां ड्रोन पहले पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र को स्कैन करेगा। सिस्टम को इस तरह विकसित किया गया है कि वह केवल तस्वीरें उपलब्ध कराने के बजाय राहत टीम को यह समझने में भी मदद करेगा कि किस स्थान पर ज्यादा खतरा है और कहां मदद की जरूरत अधिक है। ड्रोन में थर्मल कैमरा, आरजीबी कैमरा, जीपीएस और पर्यावरण सेंसर के साथ एज एआई का इस्तेमाल किया गया है। थर्मल इमेजिंग कम दृश्यता वाले स्थानों पर शरीर की गर्मी के संकेत खोजने में मदद करेगी। वहीं एआई की सहायता से इंसान और जानवर की मौजूदगी के साथ आग, अधिक तापमान और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा।
सिर्फ तलाश नहीं, किसे पहले मदद चाहिए यह जानने की कोशिश
किसी बड़ी आपदा में एक साथ कई लोग अलग-अलग स्थानों पर फंसे हो सकते हैं। ऐसे में चुनौती केवल उन्हें तलाशने की नहीं, बल्कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर बचाव की प्राथमिकता तय करने की भी होती है। जीवनसेतु में पीड़ित की स्थिति, स्थान, आसपास मौजूद खतरे, तात्कालिकता और वहां तक पहुंचने से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण कर बचाव दल को प्राथमिकता तय करने में मदद देने की परिकल्पना है। ड्रोन से जुटी जानकारी कमांड डैशबोर्ड पर दिखाई जाएगी। इसमें संभावित पीड़ितों की लोकेशन, आग या हॉटस्पॉट, हाई रिस्क जोन और ड्रोन की स्थिति एक जगह देखी जा सकेगी। आपदा में मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क भी जवाब दे सकते हैं। इसलिए सिस्टम में स्थानीय संचार व्यवस्था की परिकल्पना की गई है, ताकि इंटरनेट नहीं होने पर भी महत्वपूर्ण जानकारी बचाव टीम तक पहुंच सके।
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अभी प्रोटोटाइप तैयार करने की दिशा में काम
जीवनसेतु प्रोटोटाइप तैयार हो गया है। शुरुआती सॉफ्टवेयर और डैशबोर्ड का कॉन्सेप्ट भी विकसित किया गया है। पहले प्रोटोटाइप तैयार कर नियंत्रित वातावरण में इसका परीक्षण हो गया है। इंसान और जानवर की पहचान, खतरे का पता लगाने और जोखिम के आकलन की क्षमता को परखा गया है। पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।