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Noida News: चार निगरानी केंद्र तैयार, बिजली कनेक्शन मिलने पर शुरू होगा ट्रायल

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चार निगरानी केंद्र तैयार, बिजली कनेक्शन मिलने पर शुरू होगा ट्रायल
-ट्रायल के बाद ही जारी होगा आंकड़ा, एयरपोर्ट के केंद्र का भी चल रहा पहले ट्रायल
-ग्रेटर नोएडा में हर 5 किमी पर कुल 9 निगरानी केंद्र होंगे, दो पहले से है संचालित
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। शहर में चार नए वायु प्रदूषण गुणवत्ता निगरानी केंद्र बनकर तैयार हो चुके है। एक का ट्रायल भी शुरू हो चुका है। जबकि बिजली कनेक्शन नहीं मिलने से दो का ट्रायल अटका हुआ है। ट्रायल के बाद सीपीसीबी इन निगरानी केंद्रों पर डेटा जारी करेगा। वहीं, ग्रेनो में अभी दो और केंद्रों का निर्माण होना है। इनमें एक का निर्माण चल रहा है। जबकि एक पर अभी कब्जा नहीं मिला है। सभी 9 केंद्र शुरू होने के बाद शहर में वायु प्रदूषण का सटीक आंकड़ा सामने आएगा।

ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई निगरानी केंद्रों की संख्या में इजाफा करने का फैसला लिया गया था। ताकि यहां वायु प्रदूषण का सटीक आंकड़ा मिल सके। सभी निगरानी केंद्रों का लगाने की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो चुकी है लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। इस कारण इस सर्दी इनका लाभ मिलने की संभावना नहीं है। ग्रेटर नोएडा में फिलहाल दो स्टेशन संचालित हैं। जबकि एक नोएडा एयरपोर्ट पर बन गया है। सीपीसीबी उसका ट्रायल कर रही है। बाकी छह में से 4 निगरानी केंद्र बनकर तैयार हो चुके हैं। यूपीपीसीबी के अफसरों ने बताया कि शिव नादर विश्वविद्यालय, डीएमआईसी में यू-2 पानी की टंकी परिसर, सेंट जॉर्ज स्कूल पंचायतन और गौड़ यमुना सिटी में निगरानी केंद्र बनकर तैयार हो चुके हैं। शिव नादर विश्वविद्यालय के केंद्र का ट्रायल चल रहा है। जबकि डीएमआईसी में यू-2 पानी की टंकी परिसर और सेंट जॉर्ज स्कूल पंचायतन में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा चुका है। सर्वे भी हो गया है। कुछ अड़चन आ रही है, उनको जल्द दूर कर दिया जाएगा। उसके बाद इनका भी ट्रायल शुरू होगा। उधर गौड़ यमुना सिटी के केंद्र के बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया भी चल रही है।
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बादलपुर में नहीं मिला जमीन पर कब्जा

बादलपुर के डाॅ. भीम राव अंबेडर पार्क में भी एक निगरानी केंद्र स्थापित होगा। यहां जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में वहां का आंकड़ा मिलने में देरी होगी। वहीं, जीबीयू में केंद्र स्थापित करने का काम चल रहा है। अफसरों ने बताया कि ग्रेनो में हर 5 किमी पर एक केंद्र स्थापित किया गया है। ताकि सटीक डेटा एकत्र किया जा सके।
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