तिहरे हत्याकांड में चार आरोपियों को आजीवन कारावास
थाना दादरी क्षेत्र के गांव नांगला नैनसुख में 24 अप्रैल 2002 को दो पक्षों में हुआ था खूनी संघर्ष
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला एवं सत्र न्यायालय गौतमबुद्धनगर की अदालत ने 23 साल पुराने तिहरे हत्याकांड में चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने गांव नगला दादरी के गजेन्द्र, फिरे व दुजाना गांव के रमेश उर्फ बिट्टू व सिंटू उर्फ रविकान्त को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा करने, घर में घुसकर हमला करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाते हुए कठोर सजाएं दीं।
प्रत्येक दोषियों पर 77-77 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर प्रत्येक दोषियों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह पूरा प्रकरण थाना दादरी क्षेत्र के गांव नांगला नैनसुख का है। यहां भूमि विवाद के चलते 24 अप्रैल 2002 को दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था। घटना में तीन लोगों जेतीराम, धर्मवीर और नरेंद्र (पुत्र रतन सिंह) की मौत हो गई थी। जबकि सुरेंद्र और ममता कौर समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। शिकायतकर्ता बलबीर सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि गांव के गजेन्द्र सिंह, फिरे, संजीव उर्फ संजय, बिट्टू उर्फ रमेश और अन्य आरोपी हथियारों से लैस होकर उनके घर में घुसे थे। आरोपियों ने अवैध असलहों से फायरिंग की और धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। इस दौरान तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और अन्य घायल हो गए।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने सामूहिक रूप से हमला कर तीन निर्दोष लोगों की जान ली थी। घटनास्थल से खाली कारतूस, खून से सनी मिट्टी, कपड़े और अन्य सबूत बरामद किए गए थे। अभियोजन ने 13 गवाहों और 37 दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया। गवाहों में मृतकों के परिजन, घायल, पंचायतनामा गवाह और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक शामिल थे। वहीं दूसरी ओर आरोपियों के वकील ने कहा कि यह पूरा मामला झूठा और मनगढ़ंत है। असली घटना शिकायतकर्ता के घर नहीं बल्कि एक अन्य महिला नेपाली देवी के घर हुई थी। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता पक्ष ही हमलावर था और क्रॉस केस भी दर्ज है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने फैसले में कहा कि इस मामले में तीन लोगों की नृशंस हत्या की गई और बाकी परिवार के सदस्यों को गंभीर चोटें आईं। अदालत ने यह भी माना कि यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में तो नहीं आता लेकिन आरोपियों का अपराध बेहद गंभीर है और उन्हें कठोर सजा मिलनी चाहिए। अदालत ने आरोपियों को धारा-147 (दंगा करने), धारा 148 (घातक हथियारों से दंगा), धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 302 (हत्या), धारा 452 (घर में घुसकर हमला), धारा 506 (आपराधिक धमकी) का दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
दो आरोपियों की हो चुकी है मौत
इस मामले में शुरू में कुल छह आरोपी थे। इनमें से संजय की 2014 में और सोनू त्यागी की 2004 में मौत हो गई थी। इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। शेष चार आरोपियों पर ही अंतिम निर्णय सुनाया गया। यह मामला 2002 से अदालत में लंबित था। लगभग 23 साल तक गवाह, सबूत और दलीलें चलीं।