पहली बार मूकबधिर अभ्यार्थियों का सांकेतिक भाषा में हो रहा मूल्यांकन
- राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान ने शुरू की पहल, छात्रों में बढ़ेगा आत्मविश्वास
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पहली बार मूकबधिर अभ्यार्थियों की परीक्षा का मूल्यांकन सांकेतिक भाषा में किया जा रहा है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ने वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए मूकबधिर अभ्यार्थियों की परीक्षा ली है। जून के दूसरे सप्ताह में रिजल्ट आने की संभावना है। मूकबधिर अभ्यार्थियों की सहूलियत और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए संस्थान की ओर से यह नया प्रयास किया गया है।
एनआईओएस में तीन श्रेणियों में कक्षा तीन से आठवीं तक के पाठ्यक्रम का समावेश कर दसवीं के अभ्यार्थियों के लिए सांकेतिक भाषा का खास कोर्स चल रहा है। मूकबधिर बच्चों के लिए दसवीं में अंग्रेजी, हिंदी, गृह विज्ञान, समाजशास्त्र, कला, बिजनेस स्टडी और डाटा एंट्री ऑपरेटर विषय की सांकेतिक भाषा की वीडियो बनाकर चैनल पर अपलोड भी की गई है। पहली बार इस कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों की वीडियो के जरिए परीक्षा ली गई है। वीडियो के मूल्यांकन में देखा जाएगा कि दो मूकबधिर अभ्यार्थी किस तरह संकेतों में जवाब दे रहे हैं। अपनी बात को कितना समझा पा रहे हैं।
मूकबधिर अभ्यार्थियों के लिए संस्थान की ओर से दो हजार शब्द व बुनियादी वाक्य तैयार किए गए हैं। वहीं संस्थान की ओर से इनके लिए टॉकिंग बुक्स विकसित की गई हैं, जिन्हें संस्थान की वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड किया जा सकता है। डिजिटल इंडिया के तहत मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स की मदद ली जा रही है। एमओओसी वेब-आधारित मुफ्त दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम है, जो शिक्षा के क्षेत्र में भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करता है।
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पहली बार सांकेतिक भाषा में मूल्यांकन किया जा रहा है। फिलहाल यह दसवीं के अभ्यार्थियों के लिए शुरू किया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत संस्थान का समावेशी शिक्षा पर जोर है।
प्रो. सरोज शर्मा, चेयरपर्सन, एनआईओएस