लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को गोमती पुस्तक महोत्सव का दूसरा दिन पूरी तरह अवधी भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति के रंग में रंगा रहा। अवकाश के दिन होने के कारण पुस्तक प्रेमियों और कला-संस्कृति के चाहने वालों की भीड़ देखने लायक थी। दिनभर के कार्यक्रमों में अवधी कविता, गद्य और लोककला चर्चा का मुख्य केंद्र बने।
शाम का मुख्य आकर्षण रही लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति। अपनी भावपूर्ण आवाज और सुरों से उन्होंने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति से पहले उन्हें एनबीटी इंडिया के ट्रस्टी सुशील चंद्र त्रिवेदी ने सम्मानित किया। महोत्सव में मौजूद दर्शक उनके गीतों पर झूम उठे।
इससे पहले दिन की शुरुआत राजधानी के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों बच्चों के लिए रोमांचक सत्रों के साथ हुई। स्टोरी टेलिंग में बच्चों ने कहानियों की दुनिया में खोकर मस्ती की। राउंड द रिडल में उन्होंने पहेलियों के जवाब दिए और म्यूजिकल चेयर खेलकर थिरकते हुए आनंद लिया। कथावाचक रंजीता सचदेवा ने लोककथाओं के जरिए बच्चों को बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा कराई। उन्होंने सत्र की शुरुआत लोकप्रिय भजन ''ये चमक ये दमक'' से की और बच्चों को बुंदेलखंड की भाषा, रीति-रिवाज और लोककला से परिचित कराया।
अवधी भाषा पर हुई सारगर्भित चर्चा
अवधी की बात’ शीर्षक से आयोजित सत्र में पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह, डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित और डॉ. राम बहादुर मिश्र ने भाग लिया। सत्र में अवधी भाषा का इतिहास, भौगोलिक विस्तार, लोकगीत, क्रांतिकारी आंदोलनों में भूमिका, चुनौतियां और वैश्विक संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। सत्र का संचालन डॉ. राकेश पांडेय ने किया।
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को गोमती पुस्तक महोत्सव का दूसरा दिन पूरी तरह अवधी भाषा, सा
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को गोमती पुस्तक महोत्सव का दूसरा दिन पूरी तरह अवधी भाषा, सा
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को गोमती पुस्तक महोत्सव का दूसरा दिन पूरी तरह अवधी भाषा, सा
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को गोमती पुस्तक महोत्सव का दूसरा दिन पूरी तरह अवधी भाषा, सा
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को गोमती पुस्तक महोत्सव का दूसरा दिन पूरी तरह अवधी भाषा, सा
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को गोमती पुस्तक महोत्सव का दूसरा दिन पूरी तरह अवधी भाषा, सा