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Noida News: गौतमबुद्ध नगर के पानी में घुला फ्लोराइड, खोखली कर रहा हड्डियां

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गौतमबुद्ध नगर के पानी में घुला फ्लोराइड, खोखली कर रहा हड्डियां
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- सीजीडब्ल्यूए की रिपोर्ट में मानक से अधिक मिला जिले में फ्लोराइड
- जिले में 70 फीसदी पीने के पानी की निर्भरता भूगर्भ जल पर बनी हुई

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक बनी हुई है। यह फ्लोराइड लोगों की हड़ि्डयों को खोखला बना रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। गंभीरता को देखते हुए अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जिम्मेदार अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्लाेराइड प्राकृतिक रूप से भूगर्भ जल में पाया जाता है। अलग-अलग रिपोर्ट के मुताबिक 1 मिलीग्राम प्रति लीटर मात्रा सुरक्षित होती है। इसके लिए किसी भी तरह के शोधन की जरूरत भी नहीं होती। 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक मात्रा भूगर्भ जल में होने पर दांतों के खराब होने और हड्डियों की कमजोरी के रूप में दुष्परिणाम सामने आने लगते हैं। बीआईएस के मानक के मुताबिक 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने के लिए उचित नहीं है। इससे बचाव का एक ही तरीका है कि फ्लोराइड की मौजूदगी वाले पानी को नहीं पिया जाए। इसके उलट वैकल्पिक स्रोत से मिले पानी का ही सेवन करें।
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70 फीसदी निर्भरता भूगर्भ जल पर ही
भले ही विशेषज्ञ फ्लोराइड वाले पानी को नहीं पीने के लिए कह रहे हों। वहीं गौतमबुद्धनगर में अभी भी करीब 70 फीसदी पेयजल आपूर्ति सीधे भूगर्भ जल पर ही निर्भर करती है। बड़ी संख्या में लोगों के पास इस पानी को शोधित करने के जरूरी साधन जैसे आरओ सिस्टम तक उपलब्ध नहीं हैं। गंगाजल की आपूर्ति भी सीमित ही है जिसे भूगर्भ जल में मिलाकर ही नोएडा के अधिकांश इलाकों में आपूर्ति होती है। जिले के दूसरे इलाकों में भूगर्भ जल की पेयजल के लिए स्रोत है।


डेंटल ओपीडी में बढ़ी हुई भीड़
जिला संयुक्त अस्पताल में फ्लोराइड अधिक होने का असर डेंटल ओपीडी में साफ दिखता है। यहां अधिकांश समय भीड़ बनी रहती है। करीब 150 मरीज रोजाना यहां दांतों की समस्या लेकर पहुंचते हैं। इनमें प्रमुखता फ्लोराइड की वजह से दांतों के खराब होने की होती हैं। हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में भी फ्लोराइड की वजह से मरीज बढ़े हुए हैं।
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मांस पेशियों तक को बना रहा कमजोर
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रदीप का कहना है कि फ्लोराइड का सबसे खराब असर दांतों और हड्डी पर ही होता है। डेंटल फ्लोरोसिस, बोन फ़्लोरोसिस सबसे सामान्य बीमारियां हैं। इसके अलावा अर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस की भी शिकायत इससे हो जाती है। इसकी वजह यह है कि फ्लाेराइड की मात्रा बढ़ने पर कैल्शियम और विटामिन डी की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा मांस पेशियां भी फ्लोराइड की मौजूदगी कमजोर बनाती है। लंबे समय तक सेवन कैंसर का भी कारण बन सकता है।
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