- ग्रीन बेल्ट खत्म करने, गांव की जमीन शामिल करने और खेल सुविधाओं की जगह आवासीय निर्माण प्रस्तावित करने पर खरीदारों व किसानों ने जताई नाराजगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में सेक्टर-78 और 79 के संशोधित लेआउट को लेकर बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। आवंटित बिल्डर थ्री सी ग्रीन की ओर से तैयार नए लेआउट में ग्रीन बेल्ट खत्म करने, गांव की जमीन शामिल करने और खेल सुविधाओं के लिए निर्धारित जमीन पर अन्य निर्माण प्रस्तावित करने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। बुधवार को प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित समिति ने आपत्तियां सुनीं। अब प्राधिकरण तथ्यों के आधार पर निर्णय लेगा। सेक्टर-150, 152, 78 और 79 के लेआउट में बदलाव को लेकर पहले दो दिन सुनवाई में शामिल नहीं हो सके लोगों को बृहस्पतिवार को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने कहा कि सभी आपत्तियों को तथ्यों के साथ सुना जा रहा है।
ग्रीन बेल्ट खत्म होने से हवा-धूप प्रभावित होने की आशंका :
सेक्टर-79 स्थित गौड़ स्पोर्ट्सवुड और सिविटेक स्टेडिया के सैकड़ों फ्लैट खरीदार संशोधित लेआउट पर आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे। उनका कहना है कि वर्ष 2020 और उससे पहले प्राधिकरण के लेआउट के अनुसार सामने 30 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट की हरियाली दिखाकर फ्लैट बेचे गए थे। अब नए लेआउट में इसे समाप्त कर दिया गया है। खरीदारों की ओर से अधिवक्ता रिदिमा वर्मा ने कहा कि सोसाइटी के अंदर की ग्रीन बेल्ट को भी सेक्टर की ग्रीन बेल्ट के रूप में दिखाया गया है। इससे नए आवासीय टावर बनाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। ऐसा होने पर आसपास की सोसाइटियों में रहने वालों की हवा और धूप प्रभावित होगी। सिविटेक स्टेडिया से पहुंचीं मोनिका शर्मा और राकेश कुमार ने भी ग्रीन बेल्ट पर ग्रुप हाउसिंग प्रस्तावित करने पर आपत्ति जताई।
आबादी बढ़ने से बुनियादी सुविधाओं पर पड़ेगा असर :
गौड़ स्पोर्ट्सवुड के निवासी विकास कुमार ने कहा कि मूल लेआउट के अनुसार 70 प्रतिशत जमीन पर खेल सुविधाएं, दो प्रतिशत पर वाणिज्यिक गतिविधियां और 28 प्रतिशत पर ग्रुप हाउसिंग विकसित की जानी है। आरोप है कि ग्रीन बेल्ट को शामिल कर खेल सुविधाओं का निर्धारित क्षेत्र पूरा दिखाया जा रहा है, जबकि मौजूदा जमीन पर खेल सुविधाओं के बजाय ग्रुप हाउसिंग, अस्पताल और वाणिज्यिक निर्माण प्रस्तावित हैं। जिस जमीन पर कब्जा मिलना मुश्किल है, वहां खेल सुविधाएं दर्शाई गई हैं। इससे आबादी बढ़ने पर बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
किसानों ने गांव की जमीन शामिल करने पर जताई आपत्ति :
सोरखा गांव के किसानों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। सीएजी से सेवानिवृत्त ऑडिट अधिकारी रतनपाल सिंह और रवि यादव समेत किसानों ने आरोप लगाया कि कृषि भूमि, गांव की जमीन और अदालत में स्थगन आदेश वाली जमीनों को भी लेआउट में शामिल किया गया है। उन्होंने खेतों की मेड़बंदी, सिंचाई नालियों, जल निकासी और आवागमन के पारंपरिक रास्तों को सुरक्षित रखने की मांग की।
दो प्लॉट के आवंटियों ने भी उठाए सवाल : स्पोर्ट्स सिटी के लीड मेंबर की ओर से वर्ष 2012 के बाद उपविभाजन कर सेक्टर-78 और 79 में कई प्लॉट निकाले गए थे। इनमें सी-6 प्लॉट भी शामिल है। करीब 24 हजार वर्गमीटर के इस प्लॉट की लीज डीड प्राधिकरण ने 2014 में की थी। आवंटी के अनुसार, इसके लिए 33 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं, लेकिन संशोधित लेआउट में प्लॉट को शामिल नहीं किया गया है। एक अन्य प्लॉट के आवंटी ने भी आपत्ति दर्ज कराई। उसका मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, फिर भी संशोधित लेआउट में प्लॉट शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।