बाराबंकी। अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश शुक्ल ने घर में जबरदस्ती घर में घुसकर मूक-बधिर विधवा महिला से दुष्कर्म करने के मुकदमे में निर्णय सुनाते हुए दोषी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जबकि आरोप साबित न होने पर उसे दुष्कर्म के आरोप में दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि सुबेहा थानांतर्गत एक गांव की वादिनी ने तहरीर देकर बताया था कि गांव निवासी देवी प्रसाद ने घर में घुस कर उससे दुष्कर्म किया। पुलिस ने विवेचना के बाद देवी प्रसाद के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। पीड़िता ने कोर्ट में स्पेशल एजुकेटर के माध्यम से इशारे से बताया कि अभियुक्त देवी प्रसाद ने मुंह दबाया और कपड़ा उतारा था कोई गलत काम नहीं किया था। कोर्ट ने गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपित देवी प्रसाद को पीड़िता के घर में गृह अतिचार का दोषी पाते हुए उसे उक्त दंड से दंडित किया जबकि दुष्कर्म के मामले में दोषमुक्त कर दिया है।