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Noida News: पांच महीने की जांच, फिर एक कॉल से हुआ था निठारी कांड का खुलासा

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पांच महीने की जांच, फिर एक कॉल से हुआ था निठारी कांड का खुलासा
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- तत्कालीन एसओजी प्रभारी विनोद पांडेय ने जांच के बाद कोली को किया था गिरफ्तार

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। साल 2005-06 में निठारी और आसपास के इलाके से बड़ी संख्या में बच्चे और बच्चियां गुमशुदा होने की शिकायतें मिल रही थीं। उस वक्त के कप्तान ने एसओजी के प्रभारी विनोद पांडेय को मामले की जांच सौंपी। करीब पांच महीने की लगातार जांच के बाद गुमशुदा युवती पायल का बंद मोबाइल फोन एक दिन अचानक बज उठा। इसी कॉल के सहारे पुलिस ने निठारी कांड का सनसनीखेज खुलासा किया। जिसके बाद सुरेंद्र कोली को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

नोएडा के तत्कालीन एसओजी प्रभारी विनोद पांडेय ने बताया कि लगातार गुमशुदगी के बाद जांच शुरू होते ही नोएडा व एनसीआर के सभी अनाथालयों, रेलवे स्टेशन, होटल और ढाबे से लेकर अन्य जगहों पर छानबीन की गई। लापता बच्चे के घरवालों से बातचीत में यह बात सामने आई कि इनमें से ज्यादातर को अंतिम बार में सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के सौ से दो सौ मीटर की परिधि में देखा गया था। इसके बाद नोएडा पुलिस का शक डी-5 कोठी की तरफ गहराता गया। तभी पुलिस की जांच में पायल के लापता होने की जानकारी मिली।
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सभी लापता लोगों में पायल सबसे बड़ी थी और उसके पास मोबाइल था। पायल के गायब होने के बाद से उसका मोबाइल बंद था। पुलिस इस मोबाइल को ट्रेस कर रही थी। दिसंबर 2008 में एक दिन पायल के मोबाइल पर घंटी बजी। जिसके बाद पुलिस सुरेंद्र कोली तक पहुंच गई। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। विनोद पांडेय के मुताबिक मामले के खुलासे के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। तब से इस पर सीबीआई की टीम काम कर रही है। तत्कालीन एसओजी प्रभारी विनोद पांडेय फिलहाल हापुड़ में साइबर क्राइम इंचार्ज हैं।
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13 दिन बाद से सीबीआई ने शुरू की थी जांच

29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड का खुलासा हुआ। जिसके 13 दिन बाद 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने केस अपने हाथ में ले लिया। सीबीआई की 12 से अधिक टीम ने मामले की जांच की। सीबीआई ने भी सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया। इस मामले में कुल 19 मुकदमे दर्ज किए गए थे। शुरुआत में तीन मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। करीब 17 सालों से सीबीआई की जांच जारी है। इस दौरान यह मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक भी गया।
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