मुरादाबाद। डेफ फंड में जमा राशि खाताधारकों को वापस करने की आरबीआई की महत्वाकांक्षी योजना पहले ही शिविर में धड़ाम हो गई। दस साल से लेनदेन नहीं होने पर जिले के बैंकों से डेफ फंड में ट्रांसफर की गई 133 करोड़ की रकम में से सिर्फ दो लाख ही वापस हो पाई। आरएसईटीआई (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) कार्यालय में शुक्रवार को रकम वापसी के लिए लगाए गए कैंप में सिर्फ पांच ग्राहक ही अपनी रकम लेने पहुंचे। जबकि साढ़े पांच लाख ग्राहकों को रकम वापस करनी है।
जिले में एसबीआई, पीएनबी, केनरा, बैंक ऑफ बड़ौदा, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक समेत 31 बैंक संचालित हैं। इसमें सरकारी व अर्द्धसरकारी दोनों बैंक शामिल हैं। इन बैंकों की 248 शाखाओं में तकरीबन 45 लाख से अधिक खाताधारक हैं। इसमें सबसे अधिक खाताएं उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की हैं। इन बैंकों में पांच लाख से अधिक खाते हैं जिन्होंने 10 साल से लेन देन नहीं किया है। इन खातों में 133 करोड़ की रकम जमा है। इस धनराशि को डेफ फंड में ट्रांसफर कर दी गई है।
बैंकों को आरबीआई की ओर से डीईए (डिपॉजिट एजुकेशनल एंड अवेयरनेस) फंड में जमा राशि खाताधारकों को वापस करने के दिशा-निर्देश हैं। एसडीएम पंकज शरण के मुताबिक इसकी सूचना सभी बैंकों को समय से दे दी गई थी। डेफ खाते में जमा रकम वापस करने के लिए शुक्रवार को आरएसईटीआई कार्यालय में शिविर लगाया गया। कैंप में रकम वापस लेने महज पांच ग्राहक ही पहुंचे। इन पांच खाताधारकों को करीब दो लाख रुपये लाैटाए गए। जबकि 133 करोड़ की धनराशि डेफ खाते में पड़ी है। किसी के खाते में 23 लाख तो किसी के खाते में तीन लाख रुपये की रकम जमा है।
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इन्होंने वापस ली अपनी रकम
खाताधारक-एक
- इकबाल अहमद ने करीब 15 साल पहले पीएनबी के बागड़पुर शाखा में खाता खुलवाया था लेकिन खाते से ज्यादा दिनाें तक लेनदेन नहीं किया। इसके बाद वह इस खाते को भूल गए। बैंक ने संपर्क किया और डेफ खाते में 3430 रुपये होने की जानकारी दी। शुक्रवार को वह आरएसईटीआई कार्यालय पहुंचे और अपनी रकम ले ली। उन्होंने आरबीआई की पहले की सराहना की।
खाताधारक-दो
- अर्नव कपूर भी पीएनबी के खाताधारक हैं। उन्होंने बागड़पुर शाखा में खाता खुलवाया था। माता-पिता ने आरडी कराया था। लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। बैंक शाखा की ओर संपर्क कर इसकी जानकारी दी गई। खाता में जमा रकम 16089 शुक्रवार को मिल गए।
खाताधारक-तीन
- आशा गाैतम ने करीब 20 साल पहले खाता खुलवाया। एक स्कूल में प्रधानाचार्य रहीं। 2010 में दुर्घटना होने के कारण कुछ बैंकों का खाता भूल गईं और न ही उनके पास कोई पासबुक थी। बैंक ने सूचना दी और 38016 रुपये वापस मिल गए।
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यूपी ग्रामीण बैंक के सात, पीएनबी के पांच करोड़ डेफ फंड में
- एलडीएम पंकज शरण के मुताबिक डीईए फंड में जिले के बैंकों के साढ़े पांच लाख खाताधारकों के अभी भी 133 करोड़ की रकम जमा है। इसमें यूपी ग्रामीण बैंक सात करोड़, एसबीआई के तीन करोड़, पंजाब नेशनल बैंक के पांच करोड़ से अधिक रुपये हैं। इसके अलावा बाकी के बैंकों के 75 करोड़ रुपये से अधिक की रकम डेफ खाते में है।
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इन बैंकों ने कैंप में नहीं लगाए स्टॉल
- शुक्रवार को डीईए फंड में जमा राशि को वापस करने के लिए लगाए कैंप में कोटक महिंद्रा बैंक, बंधन बैंक, यश बैंक, पंजाब एंड सिंड बैंक, एक्सिस बैंक ने स्टॉल नहीं लगाया। जबकि इन बैंकों के पास एलडीएम कार्यालय की ओर से कैंप में शामिल होने के लिए पत्र जारी किया गया था। एलडीएम पंकज शरण ने बताया कि जो बैंक कैंप में शामिल नहीं हुए हैं उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसके बाद उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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आरबीआई एजीएम ने बैंककर्मियों से ली जानकारी
- शिविर में पहुंचे आरबीआई एजीएम नवीन मिश्रा ने बैंककर्मियों से ग्राहकों के नहीं आने की जानकारी ली। उन्होंने सभी बैंककर्मियों से डेफ खाते में पड़ी रकम की समीक्षा की। उन्होंने बैंककर्मियों से कैंप में नहीं आने वाले ग्राहकों की जानकारी भी ली। उन्होंने ग्राहकों को प्रमाणपत्र बांटा। इस दाैरान लीड बैंक ऑफिसर नितिन सागर, योगेंद्र आदि मौजूद रहे।
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ग्राहकों के नहीं आने की वजह
- बैंककर्मियों के अनुसार, इन खातों में जमा राशि को डीईए फंड में डाल दिया गया है। बैंकों ने इन खाताधारकों को पैसे वापस करने के लिए पत्र भेजा था। खाताधारकों के पते गलत होने की वजह से पत्र वापस आ गए। वहीं जिनके 20 साल पुराने खाते हैं उनमें से अधिकांश खाताधारकों का पता नहीं मिल सका। बैंककर्मियों ने बताया कि अधिकतर पुराने खातों में मोबाइल नंबर नहीं है। इस कारण भी खाताधारकों को सूचित नहीं किया जा सका। कई ऐसे भी खाताधारक हैं जिनके खातों में रकम है लेकिन वह अब विदेश रहने लगे हैं। उन्हें तो सूचित किया गया लेकिन वह नहीं आ सके।