जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाते हुए एक मिनरल वाटर कंपनी की शिकायत खारिज की
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक उपयोग के लिए बिजली कनेक्शन लेने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाते हुए एक मिनरल वाटर कंपनी की शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने कहा कि औद्योगिक एवं व्यावसायिक उद्देश्य से बिजली कनेक्शन का उपयोग करने वाली फर्म उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आती। उसका परिवाद आयोग के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है।
ग्रेटर नोएडा के साइट-5 स्थित एक मिनरल वाटर निर्माण इकाई को बिजली वितरण कंपनी ने 11 मई 2026 को बकाया बिल के भुगतान के लिए नोटिस जारी किया था। नोटिस में लगभग 21.93 लाख रुपये का बकाया 48 घंटे के भीतर जमा करने का निर्देश देते हुए कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई थी।
कंपनी प्रबंधन ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल कर बिजली कनेक्शन नहीं काटने तथा बकाया राशि 12 मासिक किस्तों में जमा करने की अनुमति देने की मांग की। कंपनी का कहना था कि यदि बिजली कनेक्शन काट दिया गया तो उत्पादन बंद हो जाएगा और कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होगी। उसने पहली किस्त 30 दिन बाद तथा उसके बाद प्रत्येक माह किस्त के रूप में भुगतान करने की अनुमति देने का अनुरोध किया।
बिजली वितरण कंपनी ने आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि कंपनी को पूर्व में भी भुगतान के लिए नोटिस दिया गया था, लेकिन बकाया राशि जमा नहीं की गई। इसके चलते 15 मई 2026 को बिजली कनेक्शन काट दिया गया। कंपनी ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता एक औद्योगिक इकाई है, जो कासना स्थित यूपीएसआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित होती है और बिजली का उपयोग व्यावसायिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के लिए करती है, इसलिए वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आती।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता का बिजली कनेक्शन औद्योगिक एवं व्यावसायिक उद्देश्य के लिए है। ऐसे मामलों में परिवाद उपभोक्ता आयोग के समक्ष विचारणीय नहीं है। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत को खारिज कर दिया।