दिल्ली में हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म की मान्यताओं से जुड़ी प्रतिज्ञाएं दोहराने के आरोप में सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के खिलाफ थाना दादरी में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह प्राथमिकी गौ रक्षा हिन्दू दल के संस्थापक अध्यक्ष वेद नागर की तहरीर पर शुक्रवार को हुई है।
तहरीर में वेद नागर ने खुद को सनातनी नागरिक और गुर्जर समाज का जिम्मेदार व्यक्ति बताया है। उन्होंने लिखा कि गुर्जर समाज के लोग भगवान शिव की उपासना करते हैं और भगवान विष्णु व भगवान श्रीराम की परंपरा में आस्था रखते हैं। उनके पूर्वजों ने सनातन धर्म, राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए अनगिनत बलिदान दिए हैं। इस संदर्भ में तहरीर में चक्रवर्ती सम्राट मिहिर भोज, वीरांगना रामप्यारी गुर्जरी, राजमाता गुजरी और राव उमराव भाटी का उल्लेख है। इन्हें समाज के गौरवशाली इतिहास और परंपरा का प्रतीक बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे इतिहास वाले समाज में जन्म लेने के बावजूद राजकुमार भाटी का यह आचरण अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
तहरीर में लगाए गए आरोप
तहरीर के मुताबिक राजकुमार भाटी ने दिल्ली के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं, भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और सनातन धर्म की मान्यताओं के निषेध से जुड़ी प्रतिज्ञाएं दोहराईं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। वेद नागर ने तहरीर में यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने ही धर्म, आराध्य देवी-देवताओं और परंपराओं का सार्वजनिक रूप से अपमान किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने लिखा कि यह मामला केवल गुर्जर समाज की भावनाओं का नहीं, बल्कि समस्त सनातन समाज की आस्था और सम्मान से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि गुर्जर समाज किसी एक राजनीतिक व्यक्ति की पहचान से नहीं, बल्कि अपने गौरवशाली इतिहास, सनातन संस्कारों, राष्ट्रभक्ति और पूर्वजों के बलिदानों से जाना जाता है। उनके अनुसार समाज ऐसे किसी व्यक्ति को अपना आदर्श नहीं मानता, जो राजनीतिक लाभ के लिए सनातन धर्म की मान्यताओं के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञाएं दोहराए। किसी राजनीतिक दल द्वारा ऐसे आचरण का समर्थन करना या उसे आदर्श के रूप में पेश करना भी उन्होंने सनातन समाज की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता बताया।
तहरीर में यह तर्क भी दिया गया है कि किसी अन्य धर्म के आराध्यों के बारे में ऐसी बातें सार्वजनिक मंच से कही जातीं, तो व्यापक विरोध की स्थिति बन सकती थी। शिकायतकर्ता के अनुसार सनातन धर्म के अनुयायियों की सहनशीलता को उनकी आस्था और देवी-देवताओं के अपमान की स्वीकृति नहीं समझा जाना चाहिए। वहीं कोतवाली प्रभारी नीरज मिश्रा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।