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Noida News: 72 हजार वर्गमीटर जमीन के फर्जीवाड़े में पूर्व जीएम समेत 11 पर एफआईआर

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- पांच करोड़ रुपये की देनदारी, जमीन हड़पने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 72 हजार वर्गमीटर जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, जमीन हड़पने और करोड़ों रुपये के गबन के मामले में कोर्ट के आदेश पर कोतवाली सेक्टर-20 में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व महाप्रबंधक रवीन्द्र तोंगड़, पत्नी कुशल सिंह समेत 11 नामजद और छह-सात अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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एफआईआर गायत्री हॉस्पिटेलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि अवि सिंह ने कोर्ट में अर्जी दी है। इसमें करीब पांच करोड़ रुपये की देनदारी, पुरानी बकाया राशि और ब्याज के कथित गबन के साथ जमीन में 73 प्रतिशत हिस्सेदारी को लेकर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक फरवरी 2011 में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-01, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 72 हजार वर्ग मीटर जमीन आवंटित की थी। आरोप है कि वर्ष 2013 में करीब 20 हजार वर्ग मीटर जमीन की सब-लीज एक निर्माण कंपनी के नाम कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कंपनी में पूर्व अधिकारी के रिश्तेदारों को निदेशक बनाया गया और उनकी पत्नी को 73 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई। आरोप है कि पद का प्रभाव इस्तेमाल कर जमीन की सब-लीज अपने लोगों को कराई गई और मूल कंपनी को निर्धारित भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद वर्ष 2014 में करीब 14 हजार वर्ग मीटर जमीन की दूसरी सब-लीज एक अन्य बिल्डर कंपनी के नाम किए जाने का आरोप है। शिकायत के अनुसार परियोजना में फ्लैटों की बुकिंग शुरू होने के बाद इसका क्षेत्रफल घटाकर 36 हजार वर्ग मीटर कर दिया गया। आरोप है कि वर्ष 2015-16 में हिस्सेदारी के लेनदेन के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों में स्थानांतरित किए गए। बाद में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर एक बिल्डर समूह के साथ मिलकर नई परियोजना विकसित की गई। परियोजना के लिए बैंक ऋण लेने में भी फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। दिसंबर 2025 में रकम और हिसाब-किताब को लेकर बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता को धमकी देने का भी आरोप है। एसीपी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में जुलाई महीने में कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बीएनएस और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस जमीन के दस्तावेज, सब-लीज, कंपनी रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है।
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