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Noida News: 16 करोड़ का जुर्माना सात करोड़ लेकर माफ, सत्येंद्र जैन पर केस

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राजधानी में 571 करोड़ रुपये की सीसीटीवी कैमरे लगाने से जुड़ी योजना से जुड़ा है मामला
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एसीबी ने भ्रष्टाचार अधिनियम व आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में किया मामला दर्ज


अमर उजाला ब्यूरो


नई दिल्ली।
आप सरकार में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) समेत कई अन्य विभागों के मंत्री रहे सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने करोड़ों रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में केस दर्ज किया है। आरोप है कि 571 करोड़ रुपये की सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना में भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) पर लगाए गए 16 करोड़ रुपये के जुर्माने को जैन ने सात करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर माफ कर दिया था।


एसीबी ने मनमोहन पांडेय की शिकायत पर सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद मंगलवार को भ्रष्टाचार अधिनियम व आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने के सतर्कता निदेशालय के प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, ताकि एसीबी को जैन के खिलाफ केस दर्ज व जांच करने की मंजूरी मिले। एसीबी के संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा के मुताबिक, 571 करोड़ रुपये की परियोजना में 70 विधानसभा क्षेत्रों में 1.4 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने थे, लेकिन परियोजना पूरी होने में देरी हुई। ऐसे में बीईएल पर 16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन बीईएल के अधिकारी जितेंद्र कुमार से सात करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर जैन ने जुर्माना माफ कर दिया। परियोजना के नोडल अधिकारी भी जैन ही थे।
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एसीबी को जब इस मामले में शिकायत मिली तो पता चला कि बीईएल पर लगा जुर्माना बिना किसी ठोस कारण के माफ किया गया है। जांच में पता चला कि जुर्माना एक बड़े भ्रष्टाचार के तहत माफ किया गया। इस पर एसीबी ने बीईएल के अधिकारी से पूछताछ की तो उसने भी आरोपों की पुष्टि की और मामले की जानकारी दी। इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच करने के लिए अनुमति मांगी गई।
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अलग-अलग ठेकेदारों से ली गई रकम

एसीबी के अनुसार, सात करोड़ की रिश्वत की रकम अलग-अलग ठेकेदारों से ली गई। इन ठेकेदारों को बीईएल से सीसीटीवी कैमरों की खेप का ऑर्डर दिलवाया गया। यही नहीं अतिरिक्त कैमरे लगाने के ऑर्डर भी इन्हीं ठेकेदारों को दिए गए। फिलहाल, एसीबी ने बीईएल और पीडब्ल्यूडी से परियोजना से जुड़े दस्तावेज आदि की जानकारी मांगी है।
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