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Noida News: चेक बाउंस मामले में आरोपी बरी

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(अदालत से)
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आस मोहम्मद को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि चेक कार बिक्री विवाद से जुड़े थे, ऋण या कानूनी देनदारी के लिए नहीं। परिवादी कृष्ण कुमार ने 2019 में आस मोहम्मद को चार लाख रुपये में हुंडई एक्सेंट कार बेची, जिसमें नकद, 1.60 लाख रुपये का चेक और फाइनेंस के लिए एक गारंटी चेक शामिल था। कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि दोनों चेक बाउंस हुए या भुगतान रोक दिया गया। आस मोहम्मद ने खाली हस्ताक्षर वाले चेक देने की बात कही। दिसंबर 2019 में कार दुर्घटनाग्रस्त होकर क्षतिग्रस्त हुई। उसने कृष्ण कुमार पर क्लेम की रकम खुद लेने और चेक न लौटाने का आरोप लगाया। अदालत ने आस मोहम्मद के तर्कों को स्वीकार कर उसे बरी कर दिया।





सत्र अदालत ने चेक बाउंस के मामले में आरोपी आस मोहम्मद को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि विवादित चेक किसी ऋण या कानूनी देनदारी के भुगतान के लिए नहीं।
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ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-प्रथम निवासी परिवादी कृष्ण कुमार ने 30 जुलाई 2019 को अपनी हुंडई एक्सेंट कार चार लाख रुपये में आरोपी को बेची थी। इसके बदले 1.10 लाख रुपये नकद दिए गए। शेष रकम के लिए 1.60 लाख रुपये का चेक दिया गया। कार एयू फाइनेंसर्स से फाइनेंस थी। इसलिए आरोपी को हर महीने 12,980 रुपये की किस्त दस महीने तक देनी थी। इसकी गारंटी के तौर पर 1.29 लाख रुपये का दूसरा चेक दिया गया। परिवादी का आरोप था कि पहला चेक अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हुआ। दोबारा लगाने से पहले आरोपी ने स्टॉप पेमेंट करा दिया। दूसरा चेक भी पेमेंट स्टॉप्ड बाय ड्रावर की टिप्पणी के साथ लौट गया। 20 फरवरी 2020 को रजिस्टर्ड नोटिस भेजा गया और भुगतान न होने पर 13 मार्च 2020 को परिवाद दाखिल हुआ। वहीं आरोपी ने कहा कि उसने कार खरीदते समय दोनों चेक खाली हस्ताक्षर करके दिए थे। पांच किस्तें चुकाई जा चुकी थीं। दिसंबर 2019 में सोनीपत के कुंडली थाना क्षेत्र में कार दुर्घटनाग्रस्त होकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। परिवादी ने पुलिस के सामने समझौता कर क्लेम की रकम खुद लेने की बात कही और चेक लौटाने का आश्वासन दिया, जो नहीं निभाया। आरोपी ने स्वयं और चालक हुसैन अली को गवाह बनाया। अदालत ने माना कि चेक किसी कर्ज या देनदारी के भुगतान के लिए नहीं थे, बल्कि कार बिक्री की शर्तों को लेकर हुए विवाद से जुड़े थे। चेक का स्टॉप पेमेंट कराया जाना भी इसी विवाद की ओर इशारा करता है। अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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