माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-58 थाना क्षेत्र में दर्ज दुष्कर्म और एससी/एसटी एक्ट के मामले में अदालत ने आरोपी सुशील कुमार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और जमानत का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने रिपोर्ट में बताया कि आरोपी उसके कॉलेज में जूनियर था। दोनों में दोस्ती हो गई थी। 25 दिसंबर 2025 को उसने पीड़िता को होटल बुलाकर संबंध बनाए और वीडियो बना ली। इसी वीडियो के सहारे वह उसे ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता के गर्भवती होने की बात बताने पर आरोपी उसे दिल्ली के एक मंदिर ले गया, जहां मांग भरकर फोटो खिंचवाई और शादी का दावा किया। आरोप है कि कुछ समय बाद उसने पीड़िता को होटल बुलाकर जूस में दवा मिलाकर पिला दी, जिससे गर्भपात हो गया। 28 जून 2026 को आरोपी पीड़िता का पीछा करता हुआ उसके घर में घुस गया और माता-पिता को धमकाया। उसी रात उसने वीडियो और चैट परिजनों व अन्य लोगों के वॉट्सऐप पर भेज दी और रिश्तेदारों को इंस्टाग्राम पर भी साझा कर दी।
वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि दोनों साथ पढ़ते थे और दोस्ती प्रेम में बदल गई। दिल्ली के मंदिर में प्रेम विवाह किया था और पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। शादी के बाद पीड़िता के परिवार वाले नाराज थे और दबाव में मुकदमा लिखाया गया। दोनों बालिग हैं और गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में विवाह कर शादी रजिस्टर्ड भी करा ली। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया।