-अस्पताल की नर्स, सौदा करने वाले उसके पति और बच्ची के माता-पिता की तलाश जारी
-संचालिका ने कहा कि जन्म के बाद बच्ची की मां ने आर्थिक तंगी का हवाला दिया और बच्ची को अच्छे परिवार को सौंपने की गुहार लगाई
-बच्ची की मां ने इलाज व अस्पताल का बिल नहीं किया था जमा, लालच के कारण संचालिका ने बच्ची को बेचने की रची थी साजिश
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। शहर के बिसरख इलाके से सामने आया यह मामला इंसानियत को झकझोर देने वाला है। जहां इलाज और भरोसे की जगह समझे जाने वाले अस्पताल में ही एक नवजात की कीमत लगा दी गई। महज पांच दिन की मासूम बच्ची को 2.60 लाख रुपये में बेचने की साजिश रची गई, और इस पूरे खेल की सूत्रधार वही महिला निकली जिस पर मरीजों की जिम्मेदारी थी। बच्ची का साैदा करने के मामले में नवजीवन अस्पताल की संचालिका समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान अस्पताल संचालिका दिल्ली निवासी यशिका गर्ग (33), बुलंदशहर निवासी अस्पताल के सफाईकर्मी गजेंद्र सिंह (35) और बुलंदशहर निवासी अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन रंजीत सिंह (24) के रूप में हुई है। गिरफ्तार आरोपियों को रविवार को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि अस्पताल की संचालिका ने अपने ही स्टाफ के साथ मिलकर नवजात को सौंपने और पैसों का सौदा करने की पूरी योजना तैयार की। गरीबी और मजबूरी का हवाला देने वाली मां की स्थिति का फायदा उठाते हुए इस अमानवीय सौदे को अंजाम देने की कोशिश की गई। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी रंजीत सिंह और गजेंद्र सिंह वर्तमान में गांव पतवाड़ी बिसरख क्षेत्र में रह रहे थे। अस्पताल की मालिक यशिका गर्ग ने उन्हें बच्ची देकर खरीदार से पैसे लेने के लिए भेजा था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम सेक्टर-2 पतवाड़ी स्थित मकान पर पहुंची। जहां से नवजीवन अस्पताल की संचालिका यशिका गर्ग को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में यशिका ने स्वीकार किया कि पांच दिन पहले एक महिला ने उसके अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया था। महिला ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए बच्ची को किसी अच्छे परिवार को देने की बात कही थी। बच्ची के इलाज और अस्पताल का बिल भी पूरी तरह जमा नहीं हुआ था। जिसके चलते उसके मन में लालच आ गया और उसने बच्ची को बेचने की योजना बना ली।
अस्पताल की नर्स ने फैलाई सूचना : अस्पताल की नर्स पुष्पा ने सोसाइटी में बच्ची के गोद देने की बात फैलाई थी। उसके पति ने खरीदार से संपर्क कर पैसे की डील तय की थी। पुलिस अब नर्स पुष्पा और उसके पति की तलाश कर रही है, जो इस पूरे मामले में मुख्य कड़ी माने जा रहे हैं। साथ ही बच्ची के माता-पिता की तलाश की जा रही है। पुलिस ने मौके से एक स्कूटी, तीन मोबाइल फोन बरामद किया हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
अस्पताल की नर्स ने पति के माध्यम से फैलाई थी सूचना : जांच में पता चला है कि बीकानेर स्वीट्स के पास नंबरदार मार्केट स्थित नवजीवन अस्पताल की नर्स पुष्पा ने ग्रेनो वेस्ट की सोसाइटी में अपने पति के माध्यम से यह बात फैलाई गई थी कि एक नवजात बच्ची है। जो गोद लेने के इच्छुक हैं वह उससे संपर्क कर सकते हैं। यह सूचना व्हाट्सएप ग्रुप में भी वायरल हो गई थी। इसके बाद ऐस सिटी सोसाइटी निवासी संगीता पत्नी अंशु माली गोयल ने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि बच्ची उन्हें मिल सकती है, लेकिन इसके लिए 2 लाख 60 हजार रुपये देने होंगे। इसके बाद महिला ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल कर सूचना दी कि एक नवजात बच्ची को अवैध रूप से बेचने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस संबंध में एक लिखित प्रार्थना पत्र भी बाल संरक्षण अधिकारी को दिया था।
चाइल्ड लाइन, जिला प्रोबेशन कार्यालय और थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम ने बिसरख कोतवाली पुलिस के साथ मिलकर एक योजना बनाई। आवेदक को निर्देश दिया गया कि वह आरोपियों से संपर्क बनाए रखे । शनिवार शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच ऐस सिटी सोसाइटी के सामने स्थित मार्केट में सौदा तय हुआ था। सौदा होने के बाद दो आरोपी सफाईकर्मी गजेंद्र सिंह और अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन रंजीत सिंह स्कूटी से मौके पर पहुंचे थे। उनके पास एक नवजात बच्ची थी। उन्होंने आवेदक और उसकी पत्नी को बच्ची दिखाकर तय रकम की मांग की। इसी दौरान पहले से तैयार पुलिस टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।
चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से मिली सूचना के बाद एएचटीयू व बिसरख कोतवाली पुलिस ने बच्ची को रेस्क्यू कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। -शक्ति मोहन अवस्थी, डीसीपी सेंट्रल नोएडा