माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायालय ने 48 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर विभिन्न बैंकों से लोन लेने के मामले में आरोपी इंदर कुमार कर्माकर की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी एक संगठित आपराधिक सिंडीकेट का हिस्सा प्रतीत होता है और उसे जमानत पर रिहा किए जाने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है।
मामला थाना सूरजपुर में दर्ज हैं। अभियोजन के अनुसार एसटीएफ टीम ने गाजियाबाद स्थित एंजल मॉल कौशांबी में दबिश देकर राम कुमार के कार्यालय से कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने मिलकर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर कई लोगों के नाम से बैंक खाते खुलवाए। मृत महिला रतना वासुदेव की संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी नकली रजिस्ट्री भी कराई गई। गिरोह ने फर्जी महिला को रतना वासुदेव बनाकर उसके नाम से दस्तावेज तैयार किए और सनाउल्लाह अंसारी के नाम पर संपत्ति का बैनामा कराया। इसके बाद एचडीएफसी बैंक से करीब 4 करोड़ 48 लाख रुपये का होम लोन पास कराया गया। बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल अंजाम दिया गया। आरोपी और सह-आरोपी राम कुमार के बीच हुई बातचीत के साक्ष्य मौजूद हैं। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच भी चल रही है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया।