- सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर वाणिज्य विभाग के सेवानिवृत अधिकारी से की ठगी
- मनी लॉड्रिंग में फंसाने की धमकी देकर ठगी की गई, साइबर थाने में मुकदमा दर्ज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। साइबर जालसाजों ने वाणिज्य विभाग के सेवानिवृत अधिकारी को सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 1.70 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। जालसाजों ने मनी लॉड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में पीडि़त की शिकायत पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सेक्टर 62 निवासी एक बुजुर्ग वाणिज्य मंत्रालय से सेवानिवृत हैं। नौ सितंबर को उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉलर ने कहा कि आपसे जुड़े एक मोबाइल नंबर से लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है और उन्हें गाली दी जा रही है। इस पर ओमप्रकाश ने कहा जो नंबर बताया जा रहा है उसका इस्तेमाल उन्होंने कभी नहीं किया। इस पर जालसाजों ने कहा कि इस मामले में आपके खिलाफ मुंबई में मुकदमा दर्ज है। इसकी एक कॉपी भी मोबाइल पर भेजी गई। उनसे पूरे मामले को लेकर क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लेने को कहा गया।
कुछ देर में ही जालसाजों ने कथित रूप से मुंबई पुलिस विभाग में कॉल ट्रांसफर कर दिया। यहां एक कथित पुलिस अधिकारी ने बताया कि जेट एयरवेज के सह संस्थापक नरेश गोयल के साथ उनका नाम मनी लांड्रिंग के मामले में सामने आया है। इस पूरे मामले की जांच सीबीआई की टीम कर रही है। इस दौरान बताया गया कि कथित आईपीएस विजय खन्ना इस मामले की जांच करेंगे। कुछ देर के बाद ही कथित विजय खन्ना की वीडियो कॉल पीडि़त के पास आई और उसने कई दस्तावेज भेजे। पत्र में 25 लाख रुपये नरेश गोयल को भेजने का जिक्र था। इसमें जो आधार कार्ड और खाते का इस्तेमाल किया गया वह ओमप्रकाश का ही था। यह भी बताया गया कि इस मामले में शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी भी मुंबई पुलिस कर सकती है।
डिजिटल तरीके से कोर्ट में किया पेश
ओमप्रकाश ने कहा कि उसकी उम्र 80 साल से ज्यादा है और वह सीनियर सिटीजन है। तबीयत भी उसकी ठीक नहीं है। ऐसे में वह मुंबई नहीं आ सकता है। तब जालसाजों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होने का विकल्प दिया और एक एप डाउनलोड कराया। डिजिटल तरीके से ही शिकायतकर्ता को कोर्ट के सामने पेश किया गया। इससे पीडि़त बुजुर्ग डर गए और जालसाजों के कहने के मुताबिक दो बार में 1.70 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिया। जालसाजों ने सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग को डराया और कहा कि क्लियरेंस मिलने के बाद रकम वापस कर दिया जाएगा। एडीसीपी साइबर सेल शैव्या गोयल ने बताया कि इस मामले में दोनों खातों की जांच की जा रही है। दोनों खाते नोएडा व बेंगलुरु के होने का पता चला है।
कथित जज ने पूछा क्यों नहीं हुई गिरफ्तारी
जालसाजों ने बुजुर्ग को जब कथित कोर्ट में ऑनलाइन पेश किया तब वहां कोर्ट जैसा ही पूरा सेटअप था। कथित आईपीएस जो बुजुर्ग के केस का जांच अधिकारी बना था। वह भी वहां मौजूद था। इस दौरान जज ने पूछा कि मनी लॉड्रिंग के गंभीर मामले में अब तक आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। इस पर कथित जांच अधिकारी ने कहा कि शिकायतकर्ता काफी बुजुर्ग हैं और उसकी तबीयत भी ठीक नहीं है। इसके बाद बुजुर्ग जांच अधिकारी की बातों में आ गए। जैसा वह कहता गया, वैसे करते गए।
दो बार में खातों में भेजी गई रकम
जालसाजों ने पीडि़त को 9 से 15 सितंबर के बीच डिजिटल अरेस्ट रखा था। पहली बार में 1 करोड़ 30 लाख रुपये जबकि दूसरी बार में 40 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। इतनी रकम भेजने के बाद भी जालसाज 20 लाख रुपये की और मांग की। इसी दौरान अखबार में इस तरह की जालसाजी की खबर बुजुर्ग ने पढ़ा और अपने बेटे को पूरी जानकारी दी। इसके बाद बेटे ने अतिरिक्त रकम देने से मना कर दिया और तुरंत साइबर सेल से शिकायत की।