-अदालत ने कहा कि अभियोजन मामले की कड़ी नहीं जोड़ पाया, संदेह के आधार पर नहीं हो सकती दोषसिद्धि
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में आरोपी सुशील यादव निवासी गांव बहलालपुर नोएडा व सतवीर यादव निवासी अमरोहा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। मामले के अनुसार वादी धर्मवीर सिंह का पुत्र सर्वन (38) अपनी पत्नी नीतू के साथ खोड़ा कालोनी में रहता था। 28 अप्रैल 2017 से लापता हो गया था। गांव के चंद्रपाल और बलराज नामक व्यक्तियों ने वादी को बताया कि उन्होंने 29 अप्रैल 2017 को सर्वन को आरोपी सुशील यादव के साथ शनि मंदिर छिजारसी के पास खड़ा देखा था। इसी आधार पर सुशील यादव व उसके अज्ञात साथी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गई।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर सेक्टर 63ए के पांच प्रतिशत प्लॉट क्षेत्र की सीवर लाइन के मेनहोल से एक प्लास्टिक के कट्टे में बंद सड़ी-गली अवस्था में लाश बरामद की गई थी। पोस्टमॉर्टम करने वाले चिकित्सक ने बताया कि शव पूरी तरह डी-कम्पोज हो चुका था, इसलिए मृत्यु का कारण बताना संभव नहीं था। मृतक की पत्नी पहले सुशील यादव के साले की पत्नी थी और बाद में सर्वन से विवाह कर लिया था। जमीन को लेकर भी विवाद था, जिसके चलते रंजिशवश हत्या की गह थी।
बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मामला पूर्णतः परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है, कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और अंतिम बार साथ देखे जाने तथा शव बरामदगी के बीच एक माह का लंबा अंतराल है। मृतक की पत्नी घटना पर महत्वपूर्ण रोशनी डाल सकती थी। उसको भी गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया।
वादी द्वारा सूचना मिलने के बावजूद रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी और गवाहों के बयानों में विरोधाभास पूरे प्रकरण को संदिग्ध बनाते हैं। अंतः कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह तथ्य संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा कि मृतक की हत्या केवल और केवल आरोपियों के द्वारा ही की गई। परिणामस्वरूप दोनों आरोपियों दोषमुक्त कर दिया।