- हाई कोर्ट ने कहा आकृति के खिलाफ वीडियो सबूत पेश करे सरकार
- नहीं तो डीएम-एससपी पर लग सकता है जुर्माना
-पांच महीने से एनएसए के तहत जेल में बंद डीयू की छात्रा की हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा
- वीडियो में कहां दिख रही पत्थरबाजी या आगजनी के लिए उकसाती
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की इतिहास की छात्रा आकृति चौधरी की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार से कथित वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा है। कोर्ट ने पूछा कि जिस वीडियो को आकृति के खिलाफ अहम साक्ष्य बताया जा रहा है, उसमें वह प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाती हुई आखिर कहां दिखाई दे रही हैं।
अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से आकृति के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य दिखाने को कहा। अदालत ने विशेष रूप से कथित वीडियो फुटेज को लेकर पुलिस से सवाल किए। पीठ ने पूछा कि क्या वीडियो में आकृति प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाती हुई नजर आ रही हैं और यदि ऐसा है तो उस फुटेज में उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से कहां दिखाई देती है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि रिकॉर्ड में ऐसा क्या है, जिससे यह साबित होता है कि आकृति ने लोगों को बुलाकर पत्थर फेंकने के लिए कहा था। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
पुलिस ने कहा- वीडियो साक्ष्य मौजूद : राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए आकृति को मामले में आरोपी ठहराया। इसके बाद अदालत ने घटना की वीडियोग्राफी को लेकर सवाल किया। पीठ ने पुलिस से पूछा कि प्रदर्शन के दौरान वीडियोग्राफी हुई थी या नहीं। यदि हुई थी तो उसमें आकृति की कथित भूमिका कहां दिखाई देती है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वीडियो फुटेज हासिल कर अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कुछ और समय मांगा। हालांकि, अदालत ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया। सरकार की ओर से मामले को अगले दिन सुबह 10 बजे सुनवाई के लिए रखने का अनुरोध किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
5 महीने से जेल में हैं आकृति : सुनवाई के दौरान अदालत ने आकृति के लंबे समय से जेल में होने का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि वह करीब पांच महीने से जेल में हैं। ऐसे में सरकार को साक्ष्य पेश करने के लिए और समय नहीं दिया जा सकता। कोर्ट के इस रुख से साफ है कि वह मामले में हिरासत के आधार और पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों की गंभीरता से जांच कर रहा है।
डीएम-एसएसपी पर लग सकता है जुर्माना: हाईकोर्ट ने मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सख्त टिप्पणी की। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि रिकॉर्ड के परीक्षण में यह सामने आता है कि आकृति के खिलाफ मनमाने तरीके से कार्रवाई की गई है तो संबंधित जिलाधिकारी और एसएसपी पर लागत यानी जुर्माना लगाया जा सकता है।
13 मई को लगा था एनएसए : आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की पढ़ाई कर चुकी हैं। उन्हें अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 13 मई को आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यव्रत वर्मा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएस) के तहत कार्रवाई की थी।