तकनीकी सहायता के नाम पर यूएस- कनाडा के लोगों से ठगी करने वाले अवैध कॉल सेंटर का खुलासा, सात गिरफ्तार- सेक्टर-3 में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर, अमेरिकी व कनाडा के लोगों के सिस्टम का रिमोट एक्सेस लेते थे आरोपी, क्रेडिट कार्ड से रकम निकालने का आरोप
- छह महीने से चल रहा था नेटवर्क, करीब 300 लोगों को ठगने का दावा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को कंप्यूटर, प्रिंटर और इंटरनेट की तकनीकी समस्या दूर करने का झांसा देकर ठगी करने वाले अवैध कॉल सेंटर का कोतवाली फेज-1 पुलिस ने खुलासा किया है। सेक्टर-3 में किराये की इमारत में चौथी मंजिल पर कॉल सेंटर का पूरा सेटअप तैयार किया गया था। आरोपी विदेशी ग्राहकों को फोन कर खुद को तकनीकी कंपनी का कर्मचारी बताते और समस्या का समाधान करने के बहाने उनके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे।
पुलिस के मुताबिक, साइबर क्राइम थाने को ई-मेल के जरिये अवैध कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना मिली थी। इस आधार पर कोतवाली फेज-1 पुलिस की टीम ने सेक्टर-3 स्थित परिसर में छापा मारा। मौके पर एक व्यक्ति केबिन में बैठा मिला, जबकि छह अन्य लोग बाहर मौजूद थे। जांच में सभी के विदेशी नागरिकों से संपर्क कर तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी करने की बात सामने आई। पुलिस ने मौके से दो कंप्यूटर सिस्टम, मॉनिटर, की-बोर्ड, माउस, हेडफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए।
पुलिस ने मौके से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान मोहम्मद याहया, मोहन, आकाश, मोहम्मद साहेब अकरम, सुमित सिंह बिष्ट, रियासत और सददमुद्दीन के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में रहते हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अमेरिका और कनाडा के ग्राहकों तक पहुंचने के लिए जियो चैट और रिंग सेंट्रल डायलर का इस्तेमाल करते थे। ग्राहकों के सामने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए आरोपी डेविड, विक्टर, माइकल और जेम्स जैसे अमेरिकी नामों का इस्तेमाल करते थे।
बातचीत के दौरान खुद को प्रिंटर कंपनी का कर्मचारी बताकर तकनीकी परेशानी दूर करने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद ग्राहक के कंप्यूटर में एलएमआई एप के जरिये रिमोट एक्सेस लिया जाता था। सिस्टम ठीक करने के बहाने ग्राहक की क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी हासिल करने के बाद उसके कार्ड से रकम चार्ज करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, ठगी से मिली रकम पहले गिरोह से जुड़े बैंक खातों में पहुंचती थी। इसके बाद रकम आरोपियों और उनके परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर निकाल ली जाती थी।
कर्मचारियों को वेतन के साथ कमीशन : पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को 20 से 30 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। इसके अलावा उनके जरिये होने वाली ठगी की रकम में करीब 20 प्रतिशत कमीशन मिलने की बात भी सामने आई है। आरोपियों को विदेशी ग्राहकों से बातचीत करने के लिए उनके जैसे लहजे में अंग्रेजी बोलने का प्रशिक्षण दिया जाता था।
300 से अधिक लोगों से ठगी की आशंका : आरोपियों ने करीब छह महीने पहले किराये की इमारत में यह सेटअप शुरू किया था। प्रारंभिक पूछताछ में करीब 300 विदेशी नागरिकों को ठगी का शिकार बनाए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि पुलिस अभी इस आंकड़े का सत्यापन कर रही है। सेक्टर-3 की इमारत की चौथी मंजिल पर आरोपियों ने करीब 40 हजार रुपये मासिक किराये पर जगह ली थी। यहां कंप्यूटर, मॉनिटर और हेडफोन लगाकर बाकायदा कॉल सेंटर की तरह काम किया जा रहा था।