- लावांश ने पुर्तगाल में आयोजित हुई वर्ल्ड स्केट ट्रैक सीरीज में 1000 मीटर में स्वर्ण और 5000 मीटर में हासिल किया रजत पदक
नितेश कुमार
ग्रेटर नोएडा। सपनों की उड़ान केवल मेहनत से नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण से भी मिलती है। नोएडा की सड़कों पर स्केटिंग के गुर सीखने वाले स्केटिंग खिलाड़ी लावांश पांडेय की कहानी इसी का जीवंत उदाहरण है। सीमित संसाधनों के साथ सड़क पर स्केटिंग सीखा और वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। लावांश आज देश के उभरते इनलाइन स्पीड स्केटिंग खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। लावांश मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के डोढ़ा चौहड़ा गांव के रहने वाले हैं।
हाल ही में पुर्तगाल में 9-12 अप्रैल तक आयोजित वर्ल्ड स्केट यूरोप ट्रैक सीरीज में लावांश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 1000 मीटर रेस में स्वर्ण पदक और 5000 मीटर पॉइंट रेस में रजत पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
बेटे के स्केटिंग में कामयाबी के लिए पिता तारादत्त पांडेय ने निजी विश्वविद्यालय में चेयरमैन ऑफिस में मैनेजर की जॉब छोड़ दी। पिता ने बताया कि उन्हें देश-विदेश में होने वाली प्रतियोगिताओं में बेटे के साथ जाने के लिए अवकाश नहीं मिल पाता था। मां दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में सीनियर नर्सिंग स्टाफ में जॉब करती हैं।
खिलाड़ी ने दस वर्ष में जीते 102 समेत 160 पदक
पिता ने बताया कि लावांश पिछले 10 वर्षों से स्केटिंग में सक्रिय हैं और अब तक स्कूल, जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 160 पदक जीत चुके हैं। इनमें 102 स्वर्ण, 42 रजत और 22 कांस्य पदक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि लावांश नोएडा से खेलते हैं और टीम वॉरियर्स अकादमी से जुड़े हैं। वह शहर के विभिन्न निजी स्केटिंग ट्रैक और सड़कों पर कोच मोहसिन राणा की निगरानी में नियमित अभ्यास करते हैं।